Friday, May 8, 2020

आज मैं सकून से हूँ, कैद नहीं हूँ

आज मैं सकून से हूँ, कैद नहीं हूँ
कायर तो नहीं बुजदिल भी नहीं हूँ

कमरे को आज गौर से देखा तो घर बन गया
मेरे बगीचे, अमरूद के पेड़, मैं बस झूमने लगा
बोला चिंता न कर पगले, अब मैं तेरे साथ हूँ
आज मैं सकून से हूँ कैद नहीं हूँ
कायर तो नहीं बुजदिल भी नहीं हूँ

कत्ल करता अरमानों का, मशीन बना था मैं
चाहत न थी टुकड़ों की पर बेबस था मैं
हकीकत आज मैं उन टुकड़ों की जान गया हूँ
आज मैं सकून से हूँ कैद नहीं हूँ
कायर तो नहीं बुजदिल भी नहीं हूँ

अपने अंदर का मैं आज ढूंढ पाया है मैंने
उलझती जिंदगी की गुत्थी सुलझाया है मैंने
जिंदगी हसीन है, मैं आजमाना चाहता हूँ
आज मैं सकून से हूँ कैद नहीं हूँ
कायर तो नहीं बुजदिल भी नहीं हूँ

फुरसत थी आज मित्रों से लम्बी बात की मैंने
चिड़ियों की चहचहाट देर तक सुनी मैंने
चहारदीवारी में छिप कर हूँ पर अकेला नहीं हूँ
आज मैं सकून से हूँ कैद नहीं हूँ
कायर तो नहीं बुजदिल भी नहीं हूँ

हर वक़्त का वक़्त होता है, गुजर जाता है
कुछ यादें, अनुभव और पैगाम दे जाता है
खुश हूं आज अपने से, अपनों से बतिया पाता हूँ
आज मैं सकून से हूँ कैद नहीं हूँ
कायर तो नहीं बुजदिल भी नहीं हूँ

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