Saturday, May 9, 2020

है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए 

मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए 

अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में 

है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए 

दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं 

दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए 

मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना 

तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए 

मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब 

मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए 

मैं ताज हूँ तो ताज को सर पर सजाएँ लोग 

मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए 

मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो 

मैं सब्र हूँ तो मुझ को दुआ देनी चाहिए 

मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे 

मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए 

सच बात कौन है जो सर-ए-आम कह सके 

मैं कह रहा हूँ मुझ को सज़ा देनी चाहिए

राहत इंदौरी

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