का शेर है-वक्त से दिन और रात,
वक्त से कल और आज.
वक्त की हर शय गुलाम,
वक्त का हर शय पे राज.
वक्त की पाबंद हैं आती-जाती रौनकें.
वक्त है कांटों का ताज.
आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे,
कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज.
-साहिर लुधियानवी
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
का शेर है-वक्त से दिन और रात,
वक्त से कल और आज.
वक्त की हर शय गुलाम,
वक्त का हर शय पे राज.
वक्त की पाबंद हैं आती-जाती रौनकें.
वक्त है कांटों का ताज.
आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे,
कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज.
-साहिर लुधियानवी