Saturday, May 2, 2026

आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे

 

का शेर है-वक्त से दिन और रात, 

वक्त से कल और आज. 

वक्त की हर शय गुलाम, 

वक्त का हर शय पे राज. 

वक्त की पाबंद हैं आती-जाती रौनकें. 

वक्त है कांटों का ताज. 

आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे, 

कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज. 


-साहिर लुधियानवी 

No comments: