ज़िंदगी में मैं कई किरदार निभा देता हूँ!
वो आज भी छुपाते हैं कई बातें हम से!
मगर मैं आज भी हर बात बता देता हूँ!
आधे दुश्मन खुद ही हार मान जाते हैं!
जब बेवज़ह बे-हिसाब मुस्कुरा देता हूँ!
आग लगाना तो मेरी फितरत ही नही!
बस सादगी से लोगों को जला देता हूँ!
बहुत सी वो बातें जो मैं कह नहीं पाता!
उन बातों को मैं कलम से जता देता हूँ!
कई लोगों ने गिराई उम्मीदों की मीनारे!
मैं तो उन को भी गिरने से बचा देता हूँ!
सब जानते हैं आँखे सच बोल जाती है!
इसलिये ही तो मैं ये नज़रे झुका देता हूँ!
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