जिंदा हूं बस तेरे चेहरे पर मरता हूं जरा
इक फिक्र है कि इक ख्याल रहता है
तेरी हिफाजत का हमेशा मलाल रहता है
दुनिया पूछती जाने क्या-क्या है मुझसे
मेरे होठों पे तेरा चर्चा बेमिशाल रहता है
के यूं ही खो गया हूं या इश्क़जदा हो गया हूं
मैं तो हर तरह से बस तुझपे फिदा हो गया हूं
बस अपनी अब मुझपे थोड़ी सी इनायत कर दे
मेहमान तेरे दिल का इक उम्दा हो गया हूं
टूटा हूं तेरे इश्क़ में टूटता भी रहूंगा यूं ही
इस कद्र दीवाना तेरे नाम का सदा हो गया हूं।।
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