मेरा दिल पत्थर नहीं मोम है
जिसे देखता है पिघल जाता हैं
ज़िन्दगी की रहों में गिर गिरकर
संभला हूँ, मगर ये कम्बख़्त दिल है
जो मोहब्बत की राहों में फिसल जाता है
सर्दी गर्मी, दिन रात, आना जाना,
दूरियां ये तो सब एक बहाना है
जिसको मिलना होता है मिल जाता है
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
No comments:
Post a Comment