या लकड़ी हो
मिट्टी हो
गीली या फिर सूखी
दीवार हो कोई या
मीनार
प्यार के रंग सब पर बिखेरे जा
सकते हैं
एक दूसरे के तन पर भी
छिड़के जा सकते हैं
खुद के और
दूसरों के चेहरों पर भी
मले जा सकते हैं
मन के प्रवेश द्वार भी रंगे
जा सकते हैं
रंगोली से सजाये जा सकते हैं
नफरत के अंगारों
घृणा की मैल को
अंदर से, बाहर से
और मन के भीतर से साफ
करके।
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