Thursday, May 7, 2020

आदमी शायरी

भीड़ तन्हाइयों का मेला है
आदमी आदमी अकेला है
- सबा अकबराबादी


सैकड़ों पुल बने फ़ासले भी मिटे
आदमी आदमी से जुदा ही रहा
- रौनक़ नईम


ज़िंदगी से ज़िंदगी रूठी रही
आदमी से आदमी बरहम रहा
- बक़ा बलूच


आदमी आदमी से मिलता है
दिल मगर कम किसी से मिलता है
- जिगर मुरादाबादी

अभी फ़र्क़ है आदमी आदमी में
अभी दूर है आदमी आदमी से
- शौक़ असर रामपुरी


रूप रंग मिलता है ख़द्द-ओ-ख़ाल मिलते हैं
आदमी नहीं मिलता आदमी के पैकर में
- ख़ुशबीर सिंह शाद

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
- निदा फ़ाज़ली


ज़िंदगी इस क़दर कठिन क्यूँ है
आदमी की भला ख़ता क्या है
- सलमान अख़्तर

जितना हंगामा ज़ियादा होगा
आदमी उतना ही तन्हा होगा
- बेदिल हैदरी


चार जानिब देख कर सच बोलिए
आदमी फिरते हैं सरकारी बहुत
- कैफ़ भोपाली

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