Thursday, May 7, 2020

सहर, सुबह शायरी

बड़े ताबां बड़े रौशन सितारे टूट जाते हैं
सहर की राह तकना ता सहर आसां नहीं होता
- अदा जाफ़री


रात कौन आया था
कर गया सहर रौशन
- मोहम्मद अल्वी


कोई हंगामा-ए-हयात नहीं
रात ख़ामोश है सहर ख़ामोश
- वाहिद प्रेमी


अपने चेहरे से जो ज़ुल्फ़ों को हटाया उस ने
देख ली शाम ने ताबिंदा सहर की सूरत
- आतिश बहावलपुरी

सहर के साथ चले रौशनी के साथ चले
तमाम उम्र किसी अजनबी के साथ चले
- ख़ुर्शीद अहमद जामी


ऐसे खोए सहर के दीवाने
लूट कर शाम तक न घर आए
- मतीन नियाज़ी

रात कौन आया था
कर गया सहर रौशन
- मोहम्मद अल्वी


सहर सहर न पुकारो दुबक के सो जाओ
तुम्हारे हिस्से की शब तो बहुत पड़ी है अभी
- आबिद आलमी

वो सहर भी तुझी से सहर थी 'असद'
शब भी तुम से है शब आज की शब न जा
- सुबहान असद


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