Sunday, May 10, 2020

एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है

एक दिन कह लीजिए जो कुछ है दिल में आप के
एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है
- जोश मलीहाबादी


रहता था सामने तिरा चेहरा खुला हुआ
पढ़ता था मैं किताब यही हर क्लास में
- शकेब जलाली



ग़ज़ब किया तिरे वादे पे एतिबार किया
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया
- दाग़ देहलवी

कब वो सुनता है कहानी मेरी
और फिर वो भी ज़बानी मेरी
- मिर्ज़ा ग़ालिब

No comments: