एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है
- जोश मलीहाबादी
रहता था सामने तिरा चेहरा खुला हुआ
पढ़ता था मैं किताब यही हर क्लास में
- शकेब जलाली
ग़ज़ब किया तिरे वादे पे एतिबार किया
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया
- दाग़ देहलवी
कब वो सुनता है कहानी मेरी
और फिर वो भी ज़बानी मेरी
- मिर्ज़ा ग़ालिब
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