हर क़दम पे नाकामी हर क़दम पे महरूमी
ग़ालिबन कोई दुश्मन दोस्तों में शामिल है
- अमीर क़ज़लबाश
देखो उस ने क़दम क़दम पर साथ दिया बेगाने का
'अख़्तर' जिस ने अहद किया था तुम से साथ निभाने का
- अख्तर लख़नवी
रस्ते की ऊँच नीच से वाक़िफ़ तो हूँ 'अमीं'
ठोकर क़दम क़दम पे मगर खा रहा हूँ मैं
- अमीन हज़ीं
मोहब्बत का रस्ता अजब गर्म था
क़दम जब धरा ख़ाक पर जल गया
- मीर हसन
सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा
मैं बूढ़ा होता जाता हूँ जवाँ होने की ख़ातिर
- ज़फ़र इक़बाल
सब का ख़ुशी से फ़ासला एक क़दम है
हर घर में बस एक ही कमरा कम है
- जावेद अख़्तर
मंज़िलें पाँव पकड़ती हैं ठहरने के लिए
शौक़ कहता है कि दो चार क़दम और सही
- साहिर लखनवी
डगर डगर वही गलियाँ चली हैं साथ मिरे
क़दम क़दम पे तिरा शहर याद आया है
- मख़मूर सईदी
तेरे ख़याल साथ थे मेरे क़दम क़दम
मैं तो किसी क़दम पे भी भूला नहीं तुझे
- मशकूर ममनून क़न्नौजी
क़दम क़दम पे पुराने सबक़ भी याद आए
क़दम क़दम पे बदलता निसाब भी झेला
- ज़िया फ़ारूक़ी
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