शायद कभी जाता ना पाई
सच कहूं,
सच कहूं तो भूल जाऊं तुझे
ये आज तक खुद को समझा ना पाई।
हालांकि जब हम रिश्ते में थे
हालांकि जब हम रिश्ते में थे
तेरा पलड़ा हमेशा भारी था
इससे पहले मैं कुछ कहती
तू बहुत कुछ कह जाता था।
वैसे तो मै हूं फास्ट बहुत
वैसे तो, मैं हूं फास्ट बहुत
पर प्यार में थोड़ी धीमी थी
बाहर से हूं सख्त बहुत ..
बाहर से हूं सख्त बहुत
पर दिल से थोड़ी भोली थी।
कुछ बदला नहीं है आज भी
कुछ बदला नहीं है आज भी
मैं वैसी की वैसी ही हूं
समेटे है कई रिश्ते खुद में
पर तेरी चाह है आज भी।
जुदा होने की पहल
जुदा होने की पहल की तो थी मैंने है
कंधों पर थी मजबूरियां, पैरों में थी बेड़ियां।
मगर तूने भी तो कहा नहीं,
मगर तूने भी तो कहा नहीं
मत जाओ ऐ मेरी जिंदगी।
इतना भी क्या तू सख्त हुआ
इतना भी क्या तू सख्त हुआ
मै लाचार होती गई
और तू देखता गया।
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