Wednesday, May 6, 2020

भूल शायद बहुत बड़ी कर ली

जितनी बटनी थी बट चुकी ये ज़मीं
अब तो बस आसमान बाक़ी है
- राजेश रेड्डी



पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं
- निदा फ़ाज़ली

भूल शायद बहुत बड़ी कर ली
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
- बशीर बद्र

मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं
मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना
- आसिम वास्ती

No comments: