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दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में
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एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है
मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की
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जब भी ये दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है
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अपने माज़ी की जुस्तुजू में बहार
पीले पत्ते तलाश करती है
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दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
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ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं
दिल ने हर चीज़ पराई दी है
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उसी का ईमाँ बदल गया है
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था
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ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है
-गुलज़ार
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कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है
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कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
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आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए'तिबार किया
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कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है
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हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
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तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
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मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है
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ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
-गुलज़ार
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