Wednesday, August 27, 2025

दोस्त दुश्मन (शेर, शायरी)

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दोस्तों और दुश्मनों में किस तरह तफ़रीक़ हो

दोस्तों और दुश्मनों की बे-रुख़ी है एक सी


जान काश्मीरी

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बहारों की नज़र में फूल और काँटे बराबर हैं

मोहब्बत क्या करेंगे दोस्त दुश्मन देखने वाले


कलीम आजिज़

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दोस्तों से इस क़दर सदमे उठाए जान पर

दिल से दुश्मन की अदावत का गिला जाता रहा


हैदर अली आतिश

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मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ

यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे


राहत इंदौरी

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मुख़ालिफ़त से मिरी शख़्सियत सँवरती है

मैं दुश्मनों का बड़ा एहतिराम करता हूँ


बशीर बद्र

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जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुल्ह की दुआ

दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो


लाला माधव राम जौहर

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सच कहते हैं कि नाम मोहब्बत का है बड़ा

उल्फ़त जता के दोस्त को दुश्मन बना लिया


जोश लखनवी






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