Wednesday, April 8, 2020

दवा शायरी

जानता उस को हूँ दवा की तरह
चाहता उस को हूँ शिफ़ा की तरह
-हक़ीर

मेरे दुख की दवा भी रखता है
ख़ुद को मुझ से जुदा भी रखता है
- विशाल खुल्लर

इश्क़ को दीजिए जुनूँ में फ़रोग़
दर्द से दर्द की दवा कीजिए
- जिगर बरेलवी

दर्द हो दुख हो तो दवा कीजे
फट पड़े आसमाँ तो क्या कीजे
- जिगर बरेलवी

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए
- राहत इंदौरी
दर्द हो तो दवा भी मुमकिन है
वहम की क्या दवा करे कोई
- यगाना चंगेज़ी

काबा भी हम गए न गया पर बुतों का इश्क़
इस दर्द की ख़ुदा के भी घर में दवा नहीं
- अमीर मीनाई
 
मौत ही आप के बीमार की क़िस्मत में न थी
वर्ना कब ज़हर का मुमकिन था दवा हो जाना
- अहसन मारहरवी

ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं
क्या दवा क्या दुआ करे कोई
- हादी मछलीशहरी
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
- मिर्ज़ा ग़ालिब

दोनों ने किया है मुझ को रुस्वा
कुछ दर्द ने और कुछ दवा ने
- वहशत रज़ा अली कलकत्वी
दर्द हो तो दवा करे कोई
मौत ही हो तो क्या करे कोई
- रियाज़ ख़ैराबादी

ज़िंदगी दर्द भी दवा भी थी
हम-सफ़र भी गुरेज़-पा भी थी
- अमजद इस्लाम अमजद

No comments: