Thursday, April 9, 2020

रात, शब शायरी

तू ही बता दे कैसे काटूं
रात और ऐसी काली रात
- ज़की काकोरवी


अब तो आराम करें सोचती आँखें मेरी
रात का आख़िरी तारा भी है जाने वाला
- वज़ीर आग़ा

आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
- मख़दूम मुहिउद्दीन


हम भी कहने लगे हैं रात को रात
हम भी गोया ख़राब होने लगे
- ज़की तारिक़

रोते फिरते हैं सारी सारी रात
अब यही रोज़गार है अपना
- मीर तक़ी मीर


मैं उस को ख़्वाब में कुछ ऐसे देखा करता था
तमाम रात वो सोते में मुस्कुराती थी
- फ़ैज़ान हाशमी

आज की रात उजाले मिरे हम-साया हैं
आज की रात जो सो लूं तो नया हो जाऊं
- नसीर तुराबी


चराग़ों को आंखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
- बशीर बद्र

हम फ़क़ीरों का पैरहन है धूप
और ये रात अपनी चादर है
- आबिद वदूद


उस को आना था कि वो मुझ को बुलाता था कहीं
रात भर बारिश थी उस का रात भर पैग़ाम था
- ज़फ़र इक़बाल

चाहता हूँ कि पुकारे तुम्हें दिन रात जहाँ
हर तरफ़ मेरी ही आवाज़ सुनाई दे मुझे
- नोमान शौक़


हादिसा कौन सा हुआ पहले
रात आई कि दिन ढला पहले
- ऐन इरफ़ान

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