तू भी मगर जाने क्यूँ मुझ से ख़फ़ा हो गया
- अशफ़ाक़ आमिर
जिस को तेरे अलम से निस्बत है
हम उसी को ख़ुशी समझते हैं
- अनवर साबरी
गाहे-गाहे अगर ख़ुशी मिलती
ग़म का इतना असर नहीं होता
- नूर क़ुरैशी
तू जो आया जान आई तू गया दिल भी गया
इक ख़ुशी आने में तेरे इक ख़ुशी जाने में है
- जलील मानिकपूरी
है ख़ुशी अपनी वही जो कुछ ख़ुशी है आप की
है वही मंज़ूर जो कुछ आप को मंज़ूर हो
- मिर्ज़ा मासिता बेग मुंतही
वो दिल ले के ख़ुश हैं मुझे ये ख़ुशी है
कि पास उन के रहता हूँ मैं दूर हो कर
- जलील मानिकपूरी
ख़ुशी से अपना घर आबाद कर के
बहुत रोएँगे तुम को याद कर के
- ज़हीर रहमती
अहबाब को दे रहा हूँ धोका
चेहरे पे ख़ुशी सजा रहा हूँ
- क़तील शिफ़ाई
चंद ख़ुशियों को बहम करने में
आदमी कितना बिखर जाता है
- फ़ैसल अजमी
तिरी ख़ुशी से अगर ग़म में भी ख़ुशी न हुई
वो ज़िंदगी तो मोहब्बत की ज़िंदगी न हुई
- जिगर मुरादाबादी
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