Sunday, April 5, 2020

देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है
- वसीम बरेलवी

आए ठहरे और रवाना हो गए
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है
- हैदर अली जाफ़री

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले
हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
- कैफ़ भोपाली

मैं इसे शोहरत कहूँ या अपनी रुस्वाई कहूं
मुझ से पहले उस गली में मेरे अफ़्साने गए
- ख़ातिर ग़ज़नवी

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