झोलियां मोतियों से भरता है
छोड़ कर घर कहां गया अपना
सूखा पत्ता हवा में उड़ता है
प्यार का धागा टूट जाता है
मन का मनका तभी बिखरता है
जब उतरता है मन के सागर में
यह जगत बाहरी सा लगता है
जहन में तेरी याद उठती है
जैसे आग सी इक धधकती है
स्वर्ग आकाश पर नहीं मिलता
स्वर्ग धरती पर उतरता है!
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