Saturday, April 4, 2020

चिराग शायरी

आख़िरी साँस ले रही थी रात
जब चराग़ आफ़्ताब से हारा
- संदीप शजर

शहर के अंधेरे को इक चराग़ काफ़ी है 
सौ चराग़ जलते हैं इक चराग़ जलने से 
- एहतिशाम अख्तर

अब चराग़ों में ज़िंदगी कम है 
दिल जलाओ कि रौशनी कम है 
- अब्दुल मजीद ख़ाँ मजीद

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी 
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है 
- वसीम बरेलवी

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा 
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता 
- वसीम बरेलवी
उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों 
तारीकियाँ भी साथ रहें रौशनी के साथ 
- असर अकबराबादी

अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रक्खा है 
मगर चराग़ ने लौ को संभाल रक्खा है 
- अहमद फ़राज़
वो दिन नहीं किरन से किरन में लगे जो आग
वो शब कहाँ चराग़ से जलते थे जब चराग़
- शकेब जलाली

इक चाँद तीरगी में समर रौशनी का था 
फिर भेद खुल गया वो भँवर रौशनी का था 
- मयंक अवस्थी
घुटन तो दिल की रही क़स्र-ए-मरमरीं में भी 
न रौशनी से हुआ कुछ न कुछ हवा से हुआ 
- ख़ालिद हसन क़ादिरी

नई सहर के हसीन सूरज तुझे ग़रीबों से वास्ता क्या 
जहाँ उजाला है सीम-ओ-ज़र का वहीं तिरी रौशनी मिलेगी 
- अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

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