Tuesday, December 31, 2019
आना हो तुम्हें तो हक़ीक़त में आओयूँ सपनों में आकर मुझे न तड़पाओ
सब ख़्वाहिशें पूरी हों 'दोस्त' ऐसा नहीं है जैसे कई अशआर मुकम्मल नहीं होते
आना हो तुम्हें तो हक़ीक़त में आओयूँ सपनों में आकर मुझे न तड़पाओ
न तापी जाती है आग तुमसे न डाला जाता है तुम से पानी.
तू दिसम्बर की धूप, सी गायब सी रहती हैं.
तू दिसम्बर की धूप, सी गायब सी रहती हैं.
सर्दी लगी तो ख़ुद को दोबारा पहन लिया.
तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
तिरा ज़िक्र क्या था अलाव था
Monday, December 30, 2019
तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
मुझे इन साज़िशों में हाथ किसी आश्ना का है
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जब भी मुँह ढक लेता हूँतेरे जुल्फों के छाँव में
दिल के ज़ख्म हमको दिखाने नहीं आते
दिल के ज़ख्म हमको दिखाने नहीं आते
Sunday, December 29, 2019
अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें
बाम से उतरती है जब हसीन दोशीज़ा
अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा
इन निगाहों ने ना जाने कितने राह देखें
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है.
ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक
Saturday, December 28, 2019
गालिब 10 शेर
Friday, December 27, 2019
किरदार खुद उभर के कहानी में आएगा
Thursday, December 26, 2019
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
जरा जरा सी खिली तबीयत ज़रा सी गमगीन हो गई !!
किसी काम में जो न आ सके मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ
इतनी गुंजाइशें रखती नहीं दुनिया मिरे दोस्त!
उस से मिलने की ख़ुशी ब'अद में दुख देती हैजश्न के ब'अद का सन्नाटा बहुत खलता है
Wednesday, December 25, 2019
लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई
हर तरफ़ फैली हुई थी रौशनी ही रौशनी
तिरा ग़म सलामत मुझे क्या कमी है
चराग़ों को आँखों में महफूज़ रखना
Tuesday, December 24, 2019
तिरा ग़म सलामत मुझे क्या कमी है
Monday, December 23, 2019
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
Sunday, December 22, 2019
ख़्वाब-दर ख़्वाब बेक़रारी है
मिलावट है तेरे इश्क में इत्र और शराब की
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे!
पिछली रात का चाँद है या है अक्स तेरी अंगडाई का!!
Saturday, December 21, 2019
तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं.....
Friday, December 20, 2019
तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के
तुम्हारा इश्क तुम्हारी वफ़ा ही काफ़ी है
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Thursday, December 19, 2019
हमारी भी ज़िद है तुम्हें हर दुआ में माँगेंगे।
इंसान तो बच जाता है मगर ज़िंदा नहीं रहता!
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
वही चराग़ बुझा जिस की लौ क़यामत थी
तड़प ए दिल तड़पने से ज़रा तासकीं होती है
अपनी सारी ख़्वाहिशों को ढेर कर आया हूँ मैं
Tuesday, December 17, 2019
जब्र शायरी
जिस के साथ न था हम-सफ़र उसी का रहा
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे
न लो इंतिक़ाम मुझ से मिरे साथ साथ चल के
उस मुसाफ़िर का सफ़र आसाँ रहा होगा
हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये
दिसम्बर की ये गुनगुनी धूप
पारिजात के फूलों-सा महकता रहा मैं!
जिन्दगी भोर है सूरज से निकलते रहिए
Monday, December 16, 2019
हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया
Sunday, December 15, 2019
ज़रा सोचो तो मेरे साथ ऐसा क्यूँ हुआ है
अगर तुम चाय हो जाओ तो हम अख़बार हो जाएं!
Saturday, December 14, 2019
जौन एलिया के तीन शेर
रूख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं
Thursday, December 12, 2019
दिल में है याद तेरी, लब पर जिक्र है तेरा!
बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था
हमीं को शमा जलाने का हौसला न हुआ
Wednesday, December 11, 2019
तुम मुझे ख्वाब में आ कर न परेशान करो!
हमीं को शमा जलाने का हौसला न हुआ
Tuesday, December 10, 2019
तुम आ मिलो तो जिन्दगी मसर्रत हो जाए।
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
हम दीवानों का पता पूछना तो पूछना यूँ
Monday, December 9, 2019
रोने से कुछ भी नहीं हासिल ऐ दिल-ऐ-सौदाई
ना दूर गई, ना साथ आई!
इश्क सोते हुए भी रुलाता है!
ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे
गली गली मिरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल
Sunday, December 8, 2019
चलिए कुछ रोज़ जी के देखते हैं
तुम छिपा लो मुझे ऐ दोस्त, गुनाहों की तरह
रो - रो के बात कहने की आदत नहीं रही
Saturday, December 7, 2019
आरजू शायरी
तुमको देखा है जब से
*हसरतों के सिक्के लिए, उजाले ख़रीदने निकले थे हम
चराग़ एक भी रौशन हुआ न शाम के बाद!
Friday, December 6, 2019
तिरे नज़दीक आता जा रहा हूँ
तिरे नज़दीक आता जा रहा हूँ
वजूद अपना मिटाता जा रहा हूँ
मुक़द्दर आज़माता जा रहा हूँ
मैं तुझ से दिल लगाता जा रहा हूँ
ज़बानी तीर खाता जा रहा हूँ
मैं फिर भी मुस्कुराता जा रहा हूँ
तुझे पाने की इक ख़्वाहिश में जानाँ
मैं कितने ज़ख़्म खाता जा रहा हूँ
अंधेरों से बहुत डरता हूँ लेकिन
चराग़ों को बुझाता जा रहा हूँ
रखे थे राह में जो दोस्तों ने
मैं सब पत्थर हटाता जा रहा हूँ
लगा कर आग अपने ही मकाँ में
मैं शो'लों को बुझाता जा रहा हूँ
अज़ल की सम्त से चल कर मैं 'आरिफ़'
अबद की सम्त जाता जा रहा हूँ
चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें
दिल पे आंखें रक्खें तेरी सांसें देखें
सुर्ख़ लबों से सब्ज़ दुआएं फूटी हैं
पीले फूलों तुम को नीली आंखें देखें
साल होने को आया है वो कब लौटेगा
आओ खेत की सैर को निकलें कूजें देखें
थोड़ी देर में जंगल हम को आक़ करेगा
बरगद देखें या बरगद की शाख़ें देखें
मेरे मालिक आप तो सब कुछ कर सकते हैं
साथ चलें हम और दुनिया की आंखें देखें
हम तेरे होंटों की लर्ज़िश कब भूले हैं
पानी में पत्थर फेंकें और लहरें देखें
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो!
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें
रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो!
एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो!
आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में
कूच का ऐलान होने को है तैयारी रखो!
ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ायम रहे
नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो!
ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो!
ले तो आए शायरी बाज़ार में 'राहत' मियाँ
क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो!
- राहत इंदौरी
ईलाज इस का मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं है
सिर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े
Thursday, December 5, 2019
कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
Wednesday, December 4, 2019
तुम्हारी सोच से लेकिन बड़ा हूँ!
न जाने किस की हमें उम्र भर तलाश रही
तुम्हारी सोच से लेकिन बड़ा हूँ!
Tuesday, December 3, 2019
छेड़ दे कोई इक नए अंदाज़ के साथ!
चाहने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है
.खुद को छोड़, सिर्फ दूसरों के लिये आईने हैं
हर एक से अपनी तबीअ'त नहीं मिलती
बरसो की सोचते है और पल की ख़बर नही है।
दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है
बड़ी तलब लगी है आज मुस्कुराने की!
कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा
Sunday, December 1, 2019
दिया तबस्सुम से जवाब
तेरे नाम की शायरी
नश्तर भी तेज़ चाहिए नासूर के लिए
हमेशा देर कर देता हूँ मैं
जो नहीं मिला उसे भूल जा
नश्तर भी तेज़ चाहिए नासूर के लिए
Saturday, November 30, 2019
कैफ़ियत शायरी
रूह सिलवट हटा रही होगी
Wednesday, November 27, 2019
छल-रहित व्यवहार मेरा
पलट के आऊंगी शाखों पे खुशबुएँ लेकर
खिज़ां की ज़द में हूँ मौसम ज़रा बदलने दे!
Tuesday, November 26, 2019
रास्ते बंद हैं सब कूचा-ए-क़ातिल के सिवा
Monday, November 25, 2019
ग़म-ए-आशिक़ी से कह दो रह-ए-आम तक न पहुँचे
हम उन्हें देखें, की उनका देखना देखें
परवीन शाकिर के 3 शेर–
Sunday, November 24, 2019
दर्द क्या होता है बताएँगे किसी रोज़
मीर की ग़ज़लें ढूंड रहा हूँ तुलसी की चौपाई में
Saturday, November 23, 2019
सिरहाने तकिये तले दबा तेरा ख्वाब है,तभी शायद हर एक नींद मेरी बेताब है!
ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
बेजान से दिल में जान आयी
लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई
कुछ इस तरह चाँद को ताक लिया करते हैं
दो रोज़ की महफ़िल है इक उम्र की तन्हाई
फिर भी नज़र को हसरत-ए-दीदार रह गई!
गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भी
Friday, November 22, 2019
नकाब हो या नसीब सरकता जरुर है।
फिर भी नज़र को हसरत-ए-दीदार रह गई!
Thursday, November 21, 2019
तोड़ेंगे गुरुर इश्क का
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें
Wednesday, November 20, 2019
जिक्र करना हमारा अपने अल्फ़ाज में...
ढूँडोगे तो इस शहर में क़ातिल न मिलेगा
यूँ आकर तेरे ख्याल ने अच्छा नहीं किया
ढूँडोगे तो इस शहर में क़ातिल न मिलेगा
Tuesday, November 19, 2019
कभी खोल ली ज़ुल्फ़ें उसने
Monday, November 18, 2019
निशानी है किसी के प्यार की!
ख़फ़ा हैं फिर भी आ कर छेड़ जाते हैं तसव्वुर में
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से
कई बार तोड़ा हैं मैंने खुद से किया वादा...
जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा
तो कुछ कांटे भी बाग मे सजाकर देखो।
तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ
Motivational शायरी
You & Me
Sunday, November 17, 2019
उल्टी हो गईं सब तदबीरें
मैंने देखाखुद को जाते हुएउसके साथ
हम जो जिंदा है जीने का हुनर रखतें है!
हमसे दीवाने भी दुनिया की ख़बर रखते हैं
इतने नादां भी नहीं हम कि भटक कर रह जाएँ
कोई मंज़िल न सही, राहगुज़र रखते हैं
रात ही रात है, बाहर कोई झाँके तो सही
यूँ तो आँखों में सभी ख़्वाब-ए-सहर रखते हैं
मार ही डाले जो बेमौत ये दुनिया वो है,
हम जो जिन्दा हैं तो जीने का हुनर रखते हैं!
हम से इस दरजा तग़ाफुल भी न बरतो साहब
हम भी कुछ अपनी दुआओं में असर रखते हैं
---जांनिसार अख्तर
लम्हे लम्हे की सियासत पे नज़र रखतें है!
हमसे दीवाने भी दुनिया की खबर रखते हैं!
इतने नादां भी नही हम की भटक कर रह जाए!
कोई मंज़िल न सही, रह गुज़र रखते है!
मार ही डाले जो बे मौत, ये वो दुनिया है!
हम जो जिंदा है जीने का हुनर रखतें है!
इस क़दर हम से तगफुल भी न बरतों साहिब! (don’t push us against the wall)
हम भी कुछ अपनी दुवाओं में असर रखते है!
बस कुछ कदम के वास्ते गैरों का अहसान हो गया
एक शाम गुजारूँगा चला जाऊँगा
इस शहर-ए-ख़मोशाँ में सदा दें तो किसे दें,
है शोर साहिलों पर सैलाब आ रहा है
दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से
Saturday, November 16, 2019
घर कर जाती है दिल में तेरी याद ,
न तो गुफ़्तगू है,न दिल उसे भूला ही है
Friday, November 15, 2019
ऐसा नहीं है की वो, मेरे शहर आता नहीं
Thursday, November 14, 2019
तुम्हारी आँखों/होठों की तौहीन है ज़रा सोचो
मेरे इश्क़ से नाराज़ इसलिए भी हूँ
Wednesday, November 13, 2019
खुदाया, बस प्यार की एक कली चाहिए..
कभी भूल कर किसी से न करो सलूक ऐसा
Yaado Me Humari Aap Bhi Khoye Honge,
Yaado Me Humari Aap Bhi Khoye Honge,
Khuli Aankho Se Kabhi Aap Bhi Soye Honge,
Mana Hasna Hai Ada Gam Chhupane Ki
Par Haste Haste Kabhi Aap Bhi Roye Honge…
जिंदगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह
बहुत सँभल के चले हम मगर सँभल न सके!
वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है~बशीर बद्र
आँखों को ग़र्क़ करने फिर ख़्वाब आ रहा है!
असरार (रहस्य) शायरी
बशीर बद्र शायरी 20
दुनिया को यूँ मिटाएगी इक्कीसवीं सदी
महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है
कुछ तो जरुर सोचा होगा... कायनात ने तेरे मेरे रिश्ते पर...
यादों में तो सब के बस गए,
तस्वीर
हमने तो मोहब्बतइस हद तक निभाई है
Tuesday, November 12, 2019
तस्वीर
बशीर बद्र की तीन गजलें
इलाज-ए-दर्द-ए-दिल तुम से मसीहा हो नहीं सकता
तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता!
- मुज़्तर ख़ैराबादी
उर्दू शायरी
सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं
अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं
- अज्ञात
बात करने का हसीं तौर-तरीक़ा सीखा
हम ने उर्दू के बहाने से सलीक़ा सीखा
- मनीश शुक्ला
वो करे बात तो हर लफ़्ज़ से ख़ुश्बू आए
ऐसी बोली वही बोले जिसे उर्दू आए
- अहमद वसी
हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना
वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना
- अज्ञात
उर्दू जिसे कहते हैं तहज़ीब का चश्मा है
वो शख़्स मोहज़्ज़ब है जिस को ये ज़बाँ आई
- रविश सिद्दीक़ी
वो उर्दू का मुसाफ़िर है यही पहचान है उस की
जिधर से भी गुज़रता है सलीक़ा छोड़ जाता है
- अज्ञात
जो दिल बांधे वो जादू जानता है
मिरा महबूब उर्दू जानता है
- अनीस देहलवी
तिरे सुख़न के सदा लोग होंगे गिरवीदा
मिठास उर्दू की थोड़ी बहुत ज़बान में रख
- मुबारक अंसारी
नहीं खेल ऐ 'दाग़' यारों से कह दो
कि आती है उर्दू ज़बाँ आते आते
- दाग़ देहलवी
वो इत्र-दान सा लहजा मिरे बुज़ुर्गों का
रची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुश्बू
- बशीर बद्र
मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, हैं दोनों इंसान
एक तस्वीर मुस्कुराती हुई
अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए
Monday, November 11, 2019
मोहब्बत करने वाले ख़ूबसूरत लोग होते हैं
वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है, उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो
मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो
मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो
वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन
वो ग़ुलाब बन के खिलेगा क्या, जो चिराग़ बन के जला न हो
कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिलो-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं
मगर उस नगर में न क़ैद कर, जहाँ ज़िन्दगी का हवा न हो
वो हज़ारों बाग़ों का बाग़ हो, तेरी बरक़तों की बहार से
जहाँ कोई शाख़ हरी न हो, जहाँ कोई फूल खिला न हो
तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे
यूँ दुआयें मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो
कभी हम भी जिस के क़रीब थे, दिलो-जाँ से बढ़कर अज़ीज़ थे
मगर आज ऐसे मिला है वो, कभी पहले जैसे मिला न हो!
-बशीर बद्र
किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी
इन आँखों से दिन-रात बरसात होगी
अगर ज़िंदगी सर्फ़-ए-जज़्बात[1] होगी
मुसाफ़िर हो तुम भी, मुसाफ़िर हैं हम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
सदाओं को अल्फाज़[2] मिलने न पायें
न बादल घिरेंगे न बरसात होगी
चराग़ों को आँखों में महफूज़[3] रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
अज़ल-ता-अब्द[4] तक सफ़र ही सफ़र है
कहीं सुबह होगी कहीं रात होगी
-बशीर बद्र
- भावनाओं में ख़र्च
- शब्द
- सुरक्षित
- आदि से अंत
फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
कि मुझे कोई तमन्ना ना रहे
Sunday, November 10, 2019
आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत
मैं नहीं तो कोई तुझको, दूसरा मिल जाएगा
सबको सन्मति दे भगवान
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
उठती ही नहीं निगाह अब किसी और की तरफ़
फिर सेख़्वाबों की कोई दुनिया आबाद करें फिर से
कब ज़िंदगी गुज़ारी है अपने हिसाब में
Saturday, November 9, 2019
इकबाल शायरी
ऐसे माहौल में दवा क्या है दुआ क्या है
वो मुझ में घुल के सो जाए!
हाय इस क़ैद को ज़ंजीर भी दरकार नहीं
अहबाब - प्रियजन शायरी
हजारों लोग शरीक हुए थे जनाज़े में उसके,तन्हाइयों के ख़ौफ़ से जो शख्स मर गया।
सभी कुछ हो चुका उन का हमारा क्या रहा
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे
Friday, November 8, 2019
हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत
हम तो रात का मतलब समझें ख़्वाब, सितारे, चाँद, चराग़
चरागों को हवाओं से इश्क़ हो गया है
न तू आया, न याद आयी तेरी इक लंबे अरसे से
जो चाहें आप ले जाएं सरे-बाज़ार बैठे हैं
मनाओ जश्न मंज़िल पर पहुंच जाने का तुम लेकिन
ख़बर उनकी भी लो यारों जो हिम्मत हार बैठे हैं
तू अब उस शहर भी जाकर सुकूं पाएगा क्या आख़िर
वहां भी कौन-से ऐ दिल तेरे ग़मख़्वार बैठे हैं
ये अदा ये आवाज़ ये लहज़ा शायरी का
न तू आया, न याद आयी तेरी इक लंबे अरसे से
जो चाहें आप ले जाएं सरे-बाज़ार बैठे हैं
मनाओ जश्न मंज़िल पर पहुंच जाने का तुम लेकिन
ख़बर उनकी भी लो यारों जो हिम्मत हार बैठे हैं
तू अब उस शहर भी जाकर सुकूं पाएगा क्या आख़िर
वहां भी कौन-से ऐ दिल तेरे ग़मख़्वार बैठे हैं
चरागों को हवाओं से इश्क़ हो गया है
ये दिन बहार के अब के भी रास न आ सके,
हम तो रात का मतलब समझें ख़्वाब, सितारे, चाँद, चराग़
हम ग़म-ज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत
तीर शायरी
जीने के लिए इस दुनिया में ग़म की भी ज़रूरत होती है।
Thursday, November 7, 2019
वो अलग बाँध के रक्खा है जो माल अच्छा है
तेरी जिंदगी से दफा हम न होंगे
मुसाफ़िरों की मोहब्बत का ए'तिबार न कर
अपने दिल के शौक़ को हद से ज़ियादा कर लिया
सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते
तुम नहीं जिंदगी में तो तुम्हारा ख्याल ही सही!
हुस्न Shayari
सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते
अपने दिल के शौक़ को हद से ज़ियादा कर लिया
Wednesday, November 6, 2019
उनके होठों से मेरे हक़ में दुआ निकली है,
उनके होठों से मेरे हक़ में दुआ निकली है,
सुकून के लिए गाँव ढूँढते हैं
कशमकश में हैं हम किधर जाएँ
तन्हाई को जगह जगह बिखराया हम ने
अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का
अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का
याद आता है हमें हाए ज़माना दिल का
तुम भी मुँह चूम लो बे-साख़्ता प्यार आ जाए
मैं सुनाऊँ जो कभी दिल से फ़साना दिल का
निगह-ए-यार ने की ख़ाना-ख़राबी ऐसी
न ठिकाना है जिगर का न ठिकाना दिल का
पूरी मेहंदी भी लगानी नहीं आती अब तक
क्यूँकर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का
ग़ुंचा-ए-गुल को वो मुट्ठी में लिए आते थे
मैं ने पूछा तो किया मुझ से बहाना दिल का
इन हसीनों का लड़कपन ही रहे या अल्लाह
होश आता है तो आता है सताना दिल का
दे ख़ुदा और जगह सीना ओ पहलू के सिवा
कि बुरे वक़्त में हो जाए ठिकाना दिल का
मेरी आग़ोश से क्या ही वो तड़प कर निकले
उन का जाना था इलाही कि ये जाना दिल का
निगह-ए-शर्म को बे-ताब किया काम किया
रंग लाया तिरी आँखों में समाना दिल का
उँगलियाँ तार-ए-गरेबाँ में उलझ जाती हैं
सख़्त दुश्वार है हाथों से दबाना दिल का
हूर की शक्ल हो तुम नूर के पुतले हो तुम
और इस पर तुम्हें आता है जलाना दिल का
छोड़ कर उस को तिरी बज़्म से क्यूँकर जाऊँ
इक जनाज़े का उठाना है उठाना दिल का
बे-दिली का जो कहा हाल तो फ़रमाते हैं
कर लिया तू ने कहीं और ठिकाना दिल का
बा'द मुद्दत के ये ऐ 'दाग़' समझ में आया
वही दाना है कहा जिस ने न माना दिल का