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Sunday, April 17, 2011

बढ़े चलो

वीर तुम बढ़े चलो
धीर तुम बढ़े चलो

साथ में ध्वजा रहे
बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं
दल कभी रुके नहीं

सामने पहाड़ हो
सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर,हटो नहीं
तुम निडर,डटो वहीं

वीर तुम बढ़े चलो
धीर तुम बढ़े चलो

प्रात हो कि रात हो
संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो
चन्द्र से बढ़े चलो

वीर तुम बढ़े चलो
धीर तुम बढ़े चलो

- द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी

Monday, August 16, 2010

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है


वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है


करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है


रहबरे राहे मुहब्बत, रह न जाना राह में
लज्जते-सेहरा न वर्दी दूरिए-मंजिल में है


अब न अगले वलवले हैं और न अरमानों की भीड़
एक मिट जाने की हसरत अब दिले-बिस्मिल में है ।


ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-कातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर,
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


हाथ जिन में हो जुनून कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से,
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम.
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें कोई रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है |

- राम प्रसाद बिस्मिल


Sunday, August 9, 2009

बूँदें

गुनगुनाती हुई आती है फ़लक से बूँदें |
शायद कोई बदली तेरे पाजेब से टकराई है ||

Wednesday, July 8, 2009

Saajish

बादलों के दरमियान कुछ ऐसी साजिश हूई,
मेरा घर मिट्टी का था मेरे ही घर बारिश हुई|
आसमां को जहाँ जिद है बिजलियाँ गिराने की,
हमें भी वहीँ आदत है आशियाँ बनाने की||

zindadi jabse..

ज़िन्दगी जबसे सजल हो गयी,
अश्क तबसे ग़ज़ल हो गयी |
जबसे छोड़ी है मैंने साड़ी ख्वाहिशें,
मेरी छोटी सी कुटिया महल हो गयी ||

akal badi ya bhais

महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंस
अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा
कोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावे
अक्ल घास जब चरने जाये- हार जाय नर अति दुख पाये
भैंस का चारा लालू खायो- निज घरवारि सी.एम. बनवायो
तुमहू भैंस का चारा खाओ- बीवी को सी.एम. बनवाओ
मोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस दूध अति होई
अकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये
अकल तो ले मोबाइल घूमे- एस.एम.एस. पा पा के झूमे
भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे- कबहूँ मिस्ड काल ना मारे
भैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीती
भैंस कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहाये
शक्तिशालिनी शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारी
अकलमन्द को कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचाने
जाकी अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक सर रोये
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारी
भैंस मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते..
So now you decide yourself !!
अक्ल बङी या भैंस !

Sunday, June 14, 2009

हम दीवानों की क्या हस्ती

हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले
मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले

आए बनकर उल्लास कभी, आँसू बनकर बह चले अभी
सब कहते ही रह गए, अरे तुम कैसे आए, कहाँ चले

किस ओर चले? मत ये पूछो, बस चलना है इसलिए चले
जग से उसका कुछ लिए चले, जग को अपना कुछ दिए चले

दो बात कहीं, दो बात सुनी, कुछ हँसे और फिर कुछ रोए
छक कर सुख दुःख के घूँटों को, हम एक भाव से पिए चले

हम भिखमंगों की दुनिया में, स्वछन्द लुटाकर प्यार चले
हम एक निशानी उर पर, ले असफलता का भार चले

हम मान रहित, अपमान रहित, जी भर कर खुलकर खेल चुके
हम हँसते हँसते आज यहाँ, प्राणों की बाजी हार चले

अब अपना और पराया क्या, आबाद रहें रुकने वाले
हम स्वयं बंधे थे, और स्वयं, हम अपने बन्धन तोड़ चले

-भगवती चरण वर्मा

Monday, March 23, 2009

अभी तक

ज़िंदगी गमों का पुलिंदा है,
ख़ुशियाँ आज कल चुनिंदा है,
कभी याद कर लिया करो इस नाचीज़ को,
ये शख्स अभी तक ज़िंदा है........?

तेरे बगैर

बेनूर हो चली है बहुत शहर की हवा,
तेज रास्तों पे कहीं खो न जाएँ हम,
उसके बगैर आज जी बहुत उदास है,
चलो कहीं से उसे ढूँढ लायें हम…

Monday, March 16, 2009

एहसास

तेरे होने के अहसास से ज़िन्दगी मुस्कुराती है,
तेरी पनाहों के साये में चाँदनी भी गुनगुनाती है.
ओढ़के सितारों का आँचल अंधेरे सँवरने लगे दोस्त,
तेरी मासूम यादें मेरे हर लम्हे को महकाती हैं!!

Sunday, February 8, 2009

झूठे वादे

अब तू ही नहीं सनम तो तेरी यादें ही सही,

इन यादों में छुपी हुई ये अँधेरी रातें ही सही,

था जिंदगी में ए दोस्त एक तेरे साथ का सहारा,

जो अब वो नहीं तो तेरे झूठे वादे ही सही…

Wednesday, January 7, 2009

Salaam

एक रंगीन झिझक एक सादा पयाम !
कैसे भूलूं किसी का वो पहला सलाम !!
[;)]

Sochta हूँ..

सोचता हूँ क्या उसे नींद आती होगी,
या मेरी तरह सिर्फ़ अश्क बहाती होगी।
वो मेरी शक्ल, मेरा नाम भुलाने वाली,
अपनी तस्वीर से क्या आँख मिलाती होगी..

Monday, September 15, 2008

मैं bhee

थोड़ा सा handsome होता,
थोड़ी सी body होती,
थोड़े बाल लंबे होते,
मैं भी राधे बनता,
अगर मेरी कोई निर्जला होती…
(सन्दर्भ - तेरे नाम)

Wednesday, September 10, 2008

Teri Yaad..

raat yoon dil mein teri khoi hui yaad aai,
jaise veeraane mein chupke se bahaar aa jaaye.
jaise sahraaon mein haule se chale baade-naseem,
jaise beemaar ko bevajah karaar aa jaaye..

रात यूं दिल में तेरी खोई हुई याद आई,
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए।
जैसे सहराओं में हौले से चले बाद-ए-नसीम,
जैसे बीमार को बेवज़ह करार आ जाए..

Haseen Gunah..

गुनाह 'गर है यह इश्क यारों,
तो फिर यह इतना हसीन गुनाह है..
कि एक काफिर सनम की खातिर,
मैं यह गुनाह बार-बार कर लूँ..

मेरे ये आंसू समंदर हो गए होते

nahi hoti baarish to patthar ho gaye hote,
yeh lehrate khet banjar ho gaye hote,
tere daaman ne saare shaher ko sailaab se roka,
warna mere yeh ansoo samandar ho gaye hote !

बारिश नहीं होती तो पत्थर हो गए होते, 
ये लहराते खेत बंजार हो गए होते। 
तेरे दामन ने सारे शहर को सैलाब से रोका,
वरना मेरे ये आंसू समंदर हो गए होते। 

Sunday, September 7, 2008

Do these..

Mithi mithi yaadon ko palakon pe saja lena,

Sath gujare hue lamhon ko dil mein basa lena.

Najar na aaye hum hakikat me agar,

To muskurake humein sapanon me bula lena..

मुस्कुराके हमें सपनों में बुला लेना..

Mithi mithi yaadon ko palakon pe saja lena,
Sath gujare hue lamhon ko dil mein basa lena.
Najar na aaye hum hakikat me agar,
To muskurake humein sapanon me bula lena..

मीठी मीठी यादों को पलकों पे सजा लेना,
साथ गुजरे लम्हों को दिल में बसा लेना।
नज़र ना आये हम हकीकत में अगर,
तो मुस्कुराके हमें सपनों में बुला लेना..

Sunday, July 20, 2008

आँसू की कीमत Aansoo ki keemat

Aansoo ki keemat wo kya jaane jo har baat pe aansoo bahate hain
Aansoo ki keemat unse puchho jo gamm mein bhi muskurate hain…

आँसू की कीमत वो क्या जाने जो हर बात पे आँसू बहाते हैं
आँसू की कीमत उनसे पूछो जो गम में भी मुस्कुराते हैं...