ज़िन्दगी जबसे सजल हो गयी,
अश्क तबसे ग़ज़ल हो गयी |
जबसे छोड़ी है मैंने साड़ी ख्वाहिशें,
मेरी छोटी सी कुटिया महल हो गयी ||
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Wednesday, July 8, 2009
Tuesday, July 7, 2009
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है..
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है |
मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है,
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है ||
समुन्दर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता,
ये आसूँ प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता |
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले,
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता ||
मुहब्बत एक एह्सासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है |
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूँ हैं,
जो तू समझे तो मोती है जो न समझे तो पानी है ||
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हँगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाब पला बैठा तो हँगामा |
अभी तक डूब कर सुनते थे हम किस्सा मुहब्बत का,
मैं किस्से को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हँगामा ||
- डॉ कुमार विश्वास
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है |
मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है,
ये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है ||
समुन्दर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता,
ये आसूँ प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता |
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले,
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता ||
मुहब्बत एक एह्सासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है |
यहाँ सब लोग कहते है मेरी आँखों में आसूँ हैं,
जो तू समझे तो मोती है जो न समझे तो पानी है ||
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हँगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाब पला बैठा तो हँगामा |
अभी तक डूब कर सुनते थे हम किस्सा मुहब्बत का,
मैं किस्से को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हँगामा ||
- डॉ कुमार विश्वास
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