आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
शायरी है सरमाया ख़ुश-नसीब लोगों का,
बाँस की हर इक टहनी बाँसुरी नहीं होती.
- हस्तीमल हस्ती
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