Wednesday, September 16, 2026

वो डूबा दहाने में गंगा के आकर

वो दीने-हिजाज़ी का बेबाक बेड़ा,

निशान जिसका अक़्सा-ए-आलम में पहुँचा।
मुज़ाहिम हुआ कोई ख़तरा न जिसका,
न ओमान में ठिटका, न क़ुल्ज़ुम में झिझका।
किए पार जिसने सातों समंदर,
वो डूबा दहाने में गंगा के आकर।

-अल्ताफ़ हुसैन हाली