हम दीवानों की क्या हस्ती, आज यहाँ कल वहाँ चले
मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चलेआए बनकर उल्लास कभी, आँसू बनकर बह चले अभी
सब कहते ही रह गए, अरे तुम कैसे आए, कहाँ चलेकिस ओर चले? मत ये पूछो, बस चलना है इसलिए चले
जग से उसका कुछ लिए चले, जग को अपना कुछ दिए चलेदो बात कहीं, दो बात सुनी, कुछ हँसे और फिर कुछ रोए
छक कर सुख दुःख के घूँटों को, हम एक भाव से पिए चलेहम भिखमंगों की दुनिया में, स्वछन्द लुटाकर प्यार चले
हम एक निशानी उर पर, ले असफलता का भार चलेहम मान रहित, अपमान रहित, जी भर कर खुलकर खेल चुके
हम हँसते हँसते आज यहाँ, प्राणों की बाजी हार चलेअब अपना और पराया क्या, आबाद रहें रुकने वाले
हम स्वयं बंधे थे, और स्वयं, हम अपने बन्धन तोड़ चले-भगवती चरण वर्मा
Showing posts with label hny. Show all posts
Showing posts with label hny. Show all posts
Sunday, June 14, 2009
हम दीवानों की क्या हस्ती
Thursday, June 4, 2009
Wednesday, May 27, 2009
पुष्प की अभिलाषा
पुष्प की अभिलाषा
चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूथा जाऊँ
चाह नहीं प्रेमी माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ
चाह नहीं सम्राटों के
शव पर हे हरि डाला जाऊँ
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इतराऊँ
मुझे तोड़ लेना बनमाली
उस पथ पर तुम देना फेंक
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जाएँ वीर अनेक
Labels:
Ashpri,
chaturvedi,
hny,
lal,
makhan,
poempoetry,
अभिलाषा,
कविता,
पुष्प,
हिनिद
Wednesday, January 7, 2009
Wednesday, September 10, 2008
Teri Yaad..
raat yoon dil mein teri khoi hui yaad aai,
jaise veeraane mein chupke se bahaar aa jaaye.
jaise sahraaon mein haule se chale baade-naseem,
jaise beemaar ko bevajah karaar aa jaaye..
jaise veeraane mein chupke se bahaar aa jaaye.
jaise sahraaon mein haule se chale baade-naseem,
jaise beemaar ko bevajah karaar aa jaaye..
रात यूं दिल में तेरी खोई हुई याद आई,
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए।
जैसे सहराओं में हौले से चले बाद-ए-नसीम,
जैसे बीमार को बेवज़ह करार आ जाए..
Haseen Gunah..
गुनाह 'गर है यह इश्क यारों,
तो फिर यह इतना हसीन गुनाह है..
कि एक काफिर सनम की खातिर,
मैं यह गुनाह बार-बार कर लूँ..
तो फिर यह इतना हसीन गुनाह है..
कि एक काफिर सनम की खातिर,
मैं यह गुनाह बार-बार कर लूँ..
Subscribe to:
Posts (Atom)