Showing posts with label पुष्प. Show all posts
Showing posts with label पुष्प. Show all posts

Wednesday, May 27, 2009

पुष्प की अभिलाषा

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूथा जाऊँ
चाह नहीं प्रेमी माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ

चाह नहीं सम्राटों के
शव पर हे हरि डाला जाऊँ
चाह नहीं देवों के सिर पर
चढूँ भाग्य पर इतराऊँ

मुझे तोड़ लेना बनमाली
उस पथ पर तुम देना फेंक
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जाएँ वीर अनेक

- माखनलाल चतुर्वेदी