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Wednesday, November 13, 2019

खुदाया, बस प्यार की एक कली चाहिए..

खुदाया मुझे जिन्दगी चाहिए,

अंधेरों में हूँ रोशनी चाहिए.

तमन्ना नहीं मिले सारा गुलशन,

बस प्यार की एक कली चाहिए..

Sunday, July 24, 2011

ओ वासंती पवन हमारे घर आना।

बहुत दिनों के बाद खिड़कियां खोली हैं
ओ वासंती पवन हमारे घर आना।
जडे़ हुए थे ताले सारे कमरों में
धूल-भरे थे आले सारे कमरों में।
उलझन और तनावों के रेशों वाले
पुरे हुए थे जाले सारे कमरों में।
बहुत दिनों के बाद संकलें डोली हैं
ओ वासंती पवन हमारे घर आना।
एक थकन-सी थी नव भाव-तरंगों में
मौन उदासी थी वाचाल उमंगों में
लेकिन आज समर्पण की भाषा वाले
मोहक-मोहक प्यारे-प्यारे रंगों में
बहुत दिनों के बाद खुशबुएं घोली हैं
ओ वासंती पवन हमारे घर आना।
पतझर ही पतझर था मन के मधुवन में
गहरा सन्नाटा सा था अन्तर्मन में
लेकिन अब गीतों की स्वच्छ मुंडेरी पर
चिंतन की छत पर भावों के आंगन में
बहुत दिनों के बाद चिरइयां बोली हैं
ओ वासंती पवन हमारे घर आना।

-
डॉ. कुंअर बेचैन

Thursday, June 4, 2009

ज़िन्दगी,

अगर साँस लेने का नाम है ज़िन्दगी,
साँस लेने के अंदाज बदलते रहिये |

Monday, April 20, 2009

सोच

सोच को बदलो, सितारे बदल जायेंगे,
नजर को बदलो, नज़ारे बदल जायेंगे;
कश्तियाँ बदलने की जरुरत नही,
दिशाओं को बदलो, किनारे बदल जायेंगे..

Wednesday, January 7, 2009

Salaam

एक रंगीन झिझक एक सादा पयाम !
कैसे भूलूं किसी का वो पहला सलाम !!
[;)]

Thursday, September 18, 2008

सलूक

कभी भूल कर किसी से न करो सलूक ऐसा,
अगर कोई तुमसे करता, तुम्हें नागवार होता..

Monday, September 15, 2008

वो

हमने माँगा था साथ उनका
वो जुदाई का गम दे गए..
हम यादों के सहारे जी लेते
वो भुलने की कसम दे गए..

Saturday, September 13, 2008

आईना

आईना अपने सामने से हटा
यह न हो ख़ुद से प्यार हो जाये

और क्या चाहिए

जिन्दगी की बेपनाह पेचीदगियों में,
बच्चों की-सी मस्ती न छूटे.
और जिन्दगी की तमाम मस्तियों ,
सच्चाई और ईमान न छूटे.
जिन्दगी से और क्या चाहिये!

कभी कभी

कुछ अपना होश न तुम्हारा ख्याल कभी,

यूँही गुजर गयी जिन्दगी कभी - कभी।

ऐ दोस्त हमने दर्द- ऐ -मोहब्बत के बावजूद,

महसूस की है तेरी जरुरत कभी - कभी। ।