आइना कोई ऐसा बना दे, ऐ ख़ुदा जो,
इंसान का चेहरा नहीं क़िरदार दिखा दे।
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Friday, October 11, 2019
इंसान का चेहरा नहीं क़िरदार दिखा दे।
Wednesday, October 9, 2019
समेटना है हुस्न तेरा
समेटना है अभी हर्फ़ हर्फ़ हुस्न तिरा,
ग़ज़ल को अपनी तिरा आईना बनाना है!
सुकूत-ए-शाम-ए-अलम तू ही कुछ बता कि तुझे,
कहाँ पे ख़्वाब कहाँ रतजगा बनाना है!
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