Showing posts with label आईना. Show all posts
Showing posts with label आईना. Show all posts

Friday, October 11, 2019

इंसान का चेहरा नहीं क़िरदार दिखा दे।

आइना कोई ऐसा बना दे, ऐ ख़ुदा जो,
इंसान का चेहरा नहीं क़िरदार दिखा दे।

Wednesday, October 9, 2019

समेटना है हुस्न तेरा

समेटना है अभी हर्फ़ हर्फ़ हुस्न तिरा,

ग़ज़ल को अपनी तिरा आईना बनाना है!

सुकूत-ए-शाम-ए-अलम तू ही कुछ बता कि तुझे,

कहाँ पे ख़्वाब कहाँ रतजगा बनाना है!


Saturday, September 13, 2008

आईना

आईना अपने सामने से हटा
यह न हो ख़ुद से प्यार हो जाये