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Thursday, October 8, 2020

ग़ज़ल, गजल शायरी

पढ़े जाओ 'बेख़ुद' ग़ज़ल पर ग़ज़ल
वो बुत बन गए हैं सुने जाएंगे
- बेख़ुद देहलवी


मेरी ग़ज़ल को मेरी जां फ़क़त ग़ज़ल न समझ
इक आइना है जो हर दम तिरे मुक़ाबिल है
- कलीम आजिज़

वक़्त इक ज़र्ब लगाए तो ग़ज़ल होती है
दर्द अगर दिल में समाए तो ग़ज़ल होती है
- राबिया सुलताना नाशाद

इक ग़ज़ल लिक्खी तो ग़म कोई पुराना जागा
फिर उसी ग़म के सबब एक ग़ज़ल और कही
- अंजुम ख़लीक़

हम से पूछो कि ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या
चंद लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाए
- जां निसार अख़्तर


जवान हो गई इक नस्ल सुनते सुनते ग़ज़ल
हम और हो गए बूढ़े ग़ज़ल सुनाते हुए
- अज़हर इनायती

ज़िंदगी सुंदर ग़ज़ल है दोस्तो
ज़िंदगी को गुनगुनाना चाहिए
- आज़िम कोहली


वो ग़ज़ल की किताब है प्यारे
उस को पढ़ना सवाब है प्यारे
- अतीक़ अंज़र

जिसे देखो ग़ज़ल पहने हुए है
बहुत सस्ता ये ज़ेवर वो गया है
- विकास शर्मा राज़


मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गईं
शेर कहती हुई आँखें उस की
- परवीन शाकिर


ग़ज़ल, गजल शायरी

पढ़े जाओ 'बेख़ुद' ग़ज़ल पर ग़ज़ल
वो बुत बन गए हैं सुने जाएंगे
- बेख़ुद देहलवी


मेरी ग़ज़ल को मेरी जां फ़क़त ग़ज़ल न समझ
इक आइना है जो हर दम तिरे मुक़ाबिल है
- कलीम आजिज़

वक़्त इक ज़र्ब लगाए तो ग़ज़ल होती है
दर्द अगर दिल में समाए तो ग़ज़ल होती है
- राबिया सुलताना नाशाद

इक ग़ज़ल लिक्खी तो ग़म कोई पुराना जागा
फिर उसी ग़म के सबब एक ग़ज़ल और कही
- अंजुम ख़लीक़

हम से पूछो कि ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या
चंद लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाए
- जां निसार अख़्तर


जवान हो गई इक नस्ल सुनते सुनते ग़ज़ल
हम और हो गए बूढ़े ग़ज़ल सुनाते हुए
- अज़हर इनायती

ज़िंदगी सुंदर ग़ज़ल है दोस्तो
ज़िंदगी को गुनगुनाना चाहिए
- आज़िम कोहली


वो ग़ज़ल की किताब है प्यारे
उस को पढ़ना सवाब है प्यारे
- अतीक़ अंज़र

जिसे देखो ग़ज़ल पहने हुए है
बहुत सस्ता ये ज़ेवर वो गया है
- विकास शर्मा राज़


मेरे चेहरे पे ग़ज़ल लिखती गईं
शेर कहती हुई आँखें उस की
- परवीन शाकिर


Friday, July 31, 2020

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं

अशआ'र मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं 
कुछ शेर फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं 

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें 
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं 

सोचो तो बड़ी चीज़ है तहज़ीब बदन की 
वर्ना ये फ़क़त आग बुझाने के लिए हैं 


आँखों में जो भर लोगे तो काँटों से चुभेंगे 
ये ख़्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं 

देखूँ तिरे हाथों को तो लगता है तिरे हाथ 
मंदिर में फ़क़त दीप जलाने के लिए हैं 

ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें 
इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं! 

Thursday, March 19, 2020

शेर गजल शायरी

हम से पूछो कि ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या 
चंद लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाए 
- जाँ निसार अख़्तर

हज़ारों शेर मेरे सो गए काग़ज़ की क़ब्रों में 
अजब माँ हूँ कोई बच्चा मिरा ज़िंदा नहीं रहता 
- बशीर बद्र

छुपी है अन-गिनत चिंगारियाँ लफ़्ज़ों के दामन में 
ज़रा पढ़ना ग़ज़ल की ये किताब आहिस्ता आहिस्ता 
- प्रेम भण्डारी

डाइरी में सारे अच्छे शेर चुन कर लिख लिए 
एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया 
- ऐतबार साजिद

अपने लहजे की हिफ़ाज़त कीजिए 
शेर हो जाते हैं ना-मालूम भी 
- निदा फ़ाज़ली

मुझ को शायर न कहो 'मीर' कि साहब मैं ने 
दर्द ओ ग़म कितने किए जम्अ तो दीवान किया 
- मीर तक़ी मीर
डाइरी में सारे अच्छे शेर चुन कर लिख लिए 
एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया 
- ऐतबार साजिद

ज़िंदगी भर की कमाई यही मिसरे दो-चार 
इस कमाई पे तो इज़्ज़त नहीं मिलने वाली 
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
इश्क़ जिस से न हो सका उस ने
शायरी में अजब सियासत की
- सलीम कौसर

ग़ज़ल का शेर तो होता है बस किसी के लिए 
मगर सितम है कि सब को सुनाना पड़ता है 
- अज़हर इनायती

'असग़र' ग़ज़ल में चाहिए वो मौज-ए-ज़िंदगी 
जो हुस्न है बुतों में जो मस्ती शराब में 
- असग़र गोंडवी
कहीं कहीं से कुछ मिसरे एक-आध ग़ज़ल कुछ शेर 
इस पूँजी पर कितना शोर मचा सकता था मैं 
- इफ़्तिख़ार आरिफ़

जागीर अपनी शायरी पहले से थी मगर
इक उम्र जब रियाज़ किया साहिरी मिली
- साहिर होशियारपुरी

तुम्हारा 'नुशूर' और तुम्हारा तख़य्युल
मोहब्बत तुम्हारी तो शायर तुम्हारा
- नुशूर वाहिदी
कभी शराब कभी शायरी कभी महफ़िल
फिर इस के बाद धड़कता हुआ अकेला दिल
- जावेद नासिर

शायरी करते रहो लेकिन रहे इतना ख़याल
दुश्मनों से दोस्ती का हौसला बाक़ी रहे
- सरवर उस्मानी
शायर थे बंद एक सिनेमा के हाल में
पंछी फँसे हुए थे शिकारी के जाल में
- दिलावर फ़िगार

किसी खिड़की का शीशा भी नहीं टूटता
शायर अपना काम जारी रखते हैं मगर
- ज़ीशान साहिल

शेर गजल शायरी

हम से पूछो कि ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या 
चंद लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाए 
- जाँ निसार अख़्तर

हज़ारों शेर मेरे सो गए काग़ज़ की क़ब्रों में 
अजब माँ हूँ कोई बच्चा मिरा ज़िंदा नहीं रहता 
- बशीर बद्र

छुपी है अन-गिनत चिंगारियाँ लफ़्ज़ों के दामन में 
ज़रा पढ़ना ग़ज़ल की ये किताब आहिस्ता आहिस्ता 
- प्रेम भण्डारी

डाइरी में सारे अच्छे शेर चुन कर लिख लिए 
एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया 
- ऐतबार साजिद

अपने लहजे की हिफ़ाज़त कीजिए 
शेर हो जाते हैं ना-मालूम भी 
- निदा फ़ाज़ली

मुझ को शायर न कहो 'मीर' कि साहब मैं ने 
दर्द ओ ग़म कितने किए जम्अ तो दीवान किया 
- मीर तक़ी मीर
डाइरी में सारे अच्छे शेर चुन कर लिख लिए 
एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया 
- ऐतबार साजिद

ज़िंदगी भर की कमाई यही मिसरे दो-चार 
इस कमाई पे तो इज़्ज़त नहीं मिलने वाली 
- इफ़्तिख़ार आरिफ़
इश्क़ जिस से न हो सका उस ने
शायरी में अजब सियासत की
- सलीम कौसर

ग़ज़ल का शेर तो होता है बस किसी के लिए 
मगर सितम है कि सब को सुनाना पड़ता है 
- अज़हर इनायती

'असग़र' ग़ज़ल में चाहिए वो मौज-ए-ज़िंदगी 
जो हुस्न है बुतों में जो मस्ती शराब में 
- असग़र गोंडवी
कहीं कहीं से कुछ मिसरे एक-आध ग़ज़ल कुछ शेर 
इस पूँजी पर कितना शोर मचा सकता था मैं 
- इफ़्तिख़ार आरिफ़

जागीर अपनी शायरी पहले से थी मगर
इक उम्र जब रियाज़ किया साहिरी मिली
- साहिर होशियारपुरी

तुम्हारा 'नुशूर' और तुम्हारा तख़य्युल
मोहब्बत तुम्हारी तो शायर तुम्हारा
- नुशूर वाहिदी
कभी शराब कभी शायरी कभी महफ़िल
फिर इस के बाद धड़कता हुआ अकेला दिल
- जावेद नासिर

शायरी करते रहो लेकिन रहे इतना ख़याल
दुश्मनों से दोस्ती का हौसला बाक़ी रहे
- सरवर उस्मानी
शायर थे बंद एक सिनेमा के हाल में
पंछी फँसे हुए थे शिकारी के जाल में
- दिलावर फ़िगार

किसी खिड़की का शीशा भी नहीं टूटता
शायर अपना काम जारी रखते हैं मगर
- ज़ीशान साहिल

Wednesday, October 9, 2019

समेटना है हुस्न तेरा

समेटना है अभी हर्फ़ हर्फ़ हुस्न तिरा,

ग़ज़ल को अपनी तिरा आईना बनाना है!

सुकूत-ए-शाम-ए-अलम तू ही कुछ बता कि तुझे,

कहाँ पे ख़्वाब कहाँ रतजगा बनाना है!