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Sunday, April 5, 2020

रोशनी शायरी

रौशनी आधी इधर आधी उधर
इक दिया रक्खा है दीवारों के बीच
- उबैदुल्लाह अलीम


मैं अंधेरे में हूँ मगर मुझ में
रौशनी ने जगह बना ली है
- अंजुम सलीमी

रौशनी हो रही है कुछ महसूस
क्या शब आख़िर तमाम को पहुंची
- असलम फ़र्रुख़ी


कहीं कोई चराग़ जलता है
कुछ न कुछ रौशनी रहेगी अभी
- अबरार अहमद

देर तक रौशनी रही कल रात
मैंने ओढ़ी थी चाँदनी कल रात
- ज़ेहरा निगाह


प्यार की जोत से घर घर है चराग़ां वर्ना
एक भी शम्अ न रौशन हो हवा के डर से
- शकेब जलाली

शम्अ है लेकिन धुंदली धुंदली
साया है लेकिन रौशन रौशन
- जिगर मुरादाबादी


चमकती बिजलियां ही बिजलियां हैं
चमन में रौशनी ही रौशनी है
- ऐन सलाम

इस बार तेरे ख़्वाब में रक्खा है अपना ख़्वाब
इस बार रौशनी में सँभाली है रौशनी
- शाहीन अब्बास


क्या कोई भटका हुआ जुगनू इधर भी आएगा
रात गहरी हो चली है रौशनी ऐ रौशनी
- हसन अख्तर जलील

रोशनी शायरी

रौशनी आधी इधर आधी उधर
इक दिया रक्खा है दीवारों के बीच
- उबैदुल्लाह अलीम


मैं अंधेरे में हूँ मगर मुझ में
रौशनी ने जगह बना ली है
- अंजुम सलीमी

रौशनी हो रही है कुछ महसूस
क्या शब आख़िर तमाम को पहुंची
- असलम फ़र्रुख़ी


कहीं कोई चराग़ जलता है
कुछ न कुछ रौशनी रहेगी अभी
- अबरार अहमद

देर तक रौशनी रही कल रात
मैंने ओढ़ी थी चाँदनी कल रात
- ज़ेहरा निगाह


प्यार की जोत से घर घर है चराग़ां वर्ना
एक भी शम्अ न रौशन हो हवा के डर से
- शकेब जलाली

शम्अ है लेकिन धुंदली धुंदली
साया है लेकिन रौशन रौशन
- जिगर मुरादाबादी


चमकती बिजलियां ही बिजलियां हैं
चमन में रौशनी ही रौशनी है
- ऐन सलाम

इस बार तेरे ख़्वाब में रक्खा है अपना ख़्वाब
इस बार रौशनी में सँभाली है रौशनी
- शाहीन अब्बास


क्या कोई भटका हुआ जुगनू इधर भी आएगा
रात गहरी हो चली है रौशनी ऐ रौशनी
- हसन अख्तर जलील

Wednesday, November 13, 2019

खुदाया, बस प्यार की एक कली चाहिए..

खुदाया मुझे जिन्दगी चाहिए,

अंधेरों में हूँ रोशनी चाहिए.

तमन्ना नहीं मिले सारा गुलशन,

बस प्यार की एक कली चाहिए..

Wednesday, October 9, 2019

चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है!

दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है,
चले आओ जहाँ तक रौशनी मालूम होती है!