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Thursday, December 3, 2020

ऐसा फूल सा आप भी बनेंI

झेलकर दूसरों की दुष्टता और निर्ममता
जो दिखाता अपनी पूर्ण सहिष्णुता
सबको महकाता जो अपनी सुगंध से
ऐसा फूल सा आप भी बनें
बांटता है जो अपनी मुस्कान और कोमलता
तितलियों और भंवरों को देता मधु का दान
सेवा और पुरस्कार की जो खान
ऐसा फूल सा आप भी बनें
ईर्ष्या , तनाव, द्वेष एवं बैर की भावनाओं को
जो रखता है अपने से कोसों दूर
सदा मन में रखता दूसरों के लिए सद्भावना
ऐसा फूल सा आप भी बनें
कुछ पाने की इच्छा और भावना से है जो ऊपर
देना और त्याग भावना ही है जिसमें अशेष
यही जिसके जीवन का मूल मंत्र और संदेश
ऐसा फूल सा आप भी बनें
हवा हो , धूप हो या बरसात
हर मौसम और हर हालत में जो
बेफिक्री से है डोलता और लहराता
ऐसा फूल सा आप भी बनें
सादगी , सुंदरता , सच्चाई का
पाठ जो पढ़ाता है
प्रेम और दया से जो सराबोर रहता है
ऐसा फूल सा आप भी बनेंI

Friday, September 4, 2020

आज से ही चलना होगा

जो वक़्त हैं आज साथ में
वो हाथ में कल ना होगा
पानी है मंज़िल कल तुम्हें तो
आज से ही चलना होगा

चमकना है अगर कुंदन सा तो
तेज़ आग में तपना होगा
गर सारे सपने करने पूरे
तो नींद से अब जगना होगा ...

पानी है मंज़िल कल तुम्हें तो
आज से ही चलना होगा

स्वर्ग, नर्क ये सब यही है
पाना है तो मरना होगा
गर पानी है रात नींद चैन की
तो दिन भर अब थकना होगा..

पानी है मंज़िल कल तुम्हें तो
आज से ही चलना होगा

रात घनी है , कही प्रभा नहीं है
ख़ुद दीपक सा जलना होगा
पाँव में छालें , कोई पास नहीं है
अब घुटनो से ही बढ़ना होगा

पानी है मंज़िल कल तुम्हें तो
आज से ही चलना होगा

Saturday, July 25, 2020

रहो हमेशा सच्चाई के तुम संग

सच्चाई के संग

रहो हमेशा सच्चाई के तुम संग
काम करो इतने सच्चे , देख दुनिया हो जाए दंग
साथ उनके हमेशा रहो जो रखते अपनी बात सही

कभी न छोड़ो तुम अपना उचित अधिकार
वह सच्चा कहलाता है जो न सहे कभी अत्याचार
साथ उनके हमेशा रहो जो रखते अपनी बात सही

न ही झुकना न ही करना है तुमको समझौता
कभी न देना झूठे सपनों को तुम न्योता
साथ उनके हमेशा रहो जो रखते अपनी बात सही

किसी भी कार्य को करने से पहले जानो बूझो
करो सही गलत की तुम हमेशा पहले पहचान
साथ उनके हमेशा रहो जो रखते अपनी बात सही

चाहे हो अकेले या हो भारी भीड़
बात कहो हमेशा सही ,सीधी रखो अपनी रीढ़
साथ उनके हमेशा रहो जो रखते अपनी बात सही

सच्चाई का संग हमेशा हमको भाता है ,
यह सच्चाई ही तो सबके जीवन में ख़ुशियां लाता है
साथ उनके हमेशा रहो जो रखते अपनी बात सही

Friday, June 12, 2020

कई वर्ष लग जाते है जीवन के ,

कई वर्ष लग जाते है जीवन के ,
एक लक्ष्य को पाने में,
समय सही है वक्त यही है ,
तु साध ले अपना लक्ष्य निशाने पे,
फिर चयन कर तु गुरुवर का,
जो दिशा दिखाए तुझको ठीक निशाने पे,
फिर चला दे अपने लक्ष्य का बाड़ ,
सीधा तीर निशाने पे,
और तु बनकर वीर लड़ेगा,
अपने राह के काटो से,
तभी तो पाएगा तु जीत,
अपने लक्ष्य प्रयासों पे,
पर याद रहे तुझको हरदम,
बाधाएं ना होगी कभी ख़तम,
हो जाए अवश्य थोड़ी ये कम,
क्योंकि जीवन जब तक जीना है,
लड़ना है हमको हर बाधाओं से,
फिर वक्त हो चाहे तेरा अंतिम,
पर जन्म नहीं ये अंतिम तेरा,
तुझको जन्म जन्म तक जन्म यही पर लेना है,
ये जीवन है संघर्ष करत तुझको ये जीवन जीना है,
बिन संघर्ष ये जीवन जीवन क्या,
जीवन तो फिर एक लाश है जिंदा,
अब तो ये है हाथ में तेरे,
तुझको जीवन जीना है,
या फिर खुद के जीवन को एक जीवित लाश बना देना,
अब तो ये है हाथ में तेरे तुझको जीवन जीना है।

Saturday, March 28, 2020

प्रेरणा motivational शायरी

मुश्किल का सामना हो तो हिम्मत न हारिए 
हिम्मत है शर्त साहिब-ए-हिम्मत से क्या न हो 
- इम्दाद इमाम असर

'अख़्तर' गुज़रते लम्हों की आहट पे यूँ न चौंक 
इस मातमी जुलूस में इक ज़िंदगी भी है 
- अख़्तर होशियारपुरी

ख़ैर से रहता है रौशन नाम-ए-नेक 
हश्र तक जलता है नेकी का चराग़ 
- ज़हीर देहलवी

सारे पत्थर नहीं होते हैं मलामत का निशाँ 
वो भी पत्थर है जो मंज़िल का निशाँ देता है 
- परवेज़ अख़्तर
ये भी तो सोचिए कभी तन्हाई में ज़रा 
दुनिया से हम ने क्या लिया दुनिया को क्या दिया 
- हफ़ीज़ मेरठी

क़तरा न हो तो बहर न आए वजूद में 
पानी की एक बूँद समुंदर से कम नहीं 
- जुनैद हज़ीं लारी
किसी को बे-सबब शोहरत नहीं मिलती है ऐ 'वाहिद' 
उन्हीं के नाम हैं दुनिया में जिन के काम अच्छे हैं 
- वाहिद प्रेमी

आस्ताँ भी कोई मिल जाएगा ऐ ज़ौक-ए-नियाज़ 
सर सलामत है तो सज्दा भी अदा हो जाएगा 
- जिगर बरेलवी

Friday, March 27, 2020

आत्मविश्वास शायरी

चला जाता हूँ हँसता खेलता मौज-ए-हवादिस से 
अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए 
- असग़र गोंडवी

चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल 
हौसला किस का बढ़ाता है कोई 
- शकील बदायुनी

रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज 
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं 
- मिर्ज़ा ग़ालिब

इन अंधेरों से परे इस शब-ए-ग़म से आगे 
इक नई सुब्ह भी है शाम-ए-अलम से आगे 
- इशरत क़ादरी

साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन 
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है 
- आल-ए-अहमद सूरूर
एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं 
वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने 
- अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है 
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है 
- शकील आज़मी
दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम 
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे 
- बशीर बद्र

इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे 
रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा 
- निदा फ़ाज़ली
चराग़-ए-राहगुज़र लाख ताबनाक सही 
जला के अपना दिया रौशनी मकान में ला 
- अकबर हैदराबादी

तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़्शाँ होती है 
क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश-ए-इंसाँ होती है 
- हफ़ीज़ बनारसी

Sunday, March 15, 2020

हिम्मत, हौसला शायरी

हिम्मत वाले पल में बदल देते हैं दुनिया को 
सोचने वाला दिल तो बैठा सोचा करता है 
-अकबर हैदराबादी

हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज़ का अलम
चुप बैठने से हल नहीं होने का मसअला
- ज़िया जालंधरी

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है 
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है 
- शकील आज़मी

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर 
तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में 
- अल्लामा इक़बाल

वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से 
वो और थे जो हार गए आसमान से 
- फ़हीम जोगापुरी

लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं 
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है 
- अमीर क़ज़लबाश
साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन 
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है 
- आल-ए-अहमद सूरूर

कठिन है काम तो हिम्मत से काम ले ऐ दिल
बिगाड़ काम न मुश्किल समझ के मुश्किल को
- वहशत रज़ा अली कलकत्वी
देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार 
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख 
- मजरूह सुल्तानपुरी

ज़रा दरिया की तह तक तो पहुँच जाने की हिम्मत कर
तो फिर ऐ डूबने वाले किनारा ही किनारा है
- बासित भोपाली

उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है 
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है 
- नफ़स अम्बालवी
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो 
हौसले मुश्किलों में पलते हैं 
- महफूजुर्रहमान आदिल

सिवाए मेरे किसी को जलने का होश कब था
चराग़ की लौ बुलंद थी और रात कम थी
- मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
अपनी ही रवानी में बहता नज़र आता है
ये शहर बुलंदी से दरिया नज़र आता है
- इनाम नदीम

हाँ आसमान अपनी बुलंदी से होशियार
अब सर उठा रहे हैं किसी आस्ताँ से हम
- जोश मलीहाबादी

Wednesday, March 11, 2020

जिन के मज़बूत इरादे बने पहचान उन की मंज़िलें आप ही हो जाती हैं आसान उन की!

जिन के मज़बूत इरादे बने पहचान उन की 
मंज़िलें आप ही हो जाती हैं आसान उन की! 

Thursday, October 10, 2019

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं
तू इंसान है, अवतार नहीं
गिर, उठ, चल, दौड़, भाग
क्योंकि,
जीवन संक्षिप्त है
इसका कोई सार नहीं!