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Thursday, December 3, 2020

ऐसा फूल सा आप भी बनेंI

झेलकर दूसरों की दुष्टता और निर्ममता
जो दिखाता अपनी पूर्ण सहिष्णुता
सबको महकाता जो अपनी सुगंध से
ऐसा फूल सा आप भी बनें
बांटता है जो अपनी मुस्कान और कोमलता
तितलियों और भंवरों को देता मधु का दान
सेवा और पुरस्कार की जो खान
ऐसा फूल सा आप भी बनें
ईर्ष्या , तनाव, द्वेष एवं बैर की भावनाओं को
जो रखता है अपने से कोसों दूर
सदा मन में रखता दूसरों के लिए सद्भावना
ऐसा फूल सा आप भी बनें
कुछ पाने की इच्छा और भावना से है जो ऊपर
देना और त्याग भावना ही है जिसमें अशेष
यही जिसके जीवन का मूल मंत्र और संदेश
ऐसा फूल सा आप भी बनें
हवा हो , धूप हो या बरसात
हर मौसम और हर हालत में जो
बेफिक्री से है डोलता और लहराता
ऐसा फूल सा आप भी बनें
सादगी , सुंदरता , सच्चाई का
पाठ जो पढ़ाता है
प्रेम और दया से जो सराबोर रहता है
ऐसा फूल सा आप भी बनेंI

Friday, March 27, 2020

आत्मविश्वास शायरी

चला जाता हूँ हँसता खेलता मौज-ए-हवादिस से 
अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए 
- असग़र गोंडवी

चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल 
हौसला किस का बढ़ाता है कोई 
- शकील बदायुनी

रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज 
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं 
- मिर्ज़ा ग़ालिब

इन अंधेरों से परे इस शब-ए-ग़म से आगे 
इक नई सुब्ह भी है शाम-ए-अलम से आगे 
- इशरत क़ादरी

साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन 
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है 
- आल-ए-अहमद सूरूर
एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं 
वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने 
- अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है 
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है 
- शकील आज़मी
दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम 
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे 
- बशीर बद्र

इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे 
रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा 
- निदा फ़ाज़ली
चराग़-ए-राहगुज़र लाख ताबनाक सही 
जला के अपना दिया रौशनी मकान में ला 
- अकबर हैदराबादी

तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़्शाँ होती है 
क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश-ए-इंसाँ होती है 
- हफ़ीज़ बनारसी

Sunday, March 15, 2020

हिम्मत, हौसला शायरी

हिम्मत वाले पल में बदल देते हैं दुनिया को 
सोचने वाला दिल तो बैठा सोचा करता है 
-अकबर हैदराबादी

हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज़ का अलम
चुप बैठने से हल नहीं होने का मसअला
- ज़िया जालंधरी

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है 
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है 
- शकील आज़मी

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर 
तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में 
- अल्लामा इक़बाल

वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से 
वो और थे जो हार गए आसमान से 
- फ़हीम जोगापुरी

लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं 
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है 
- अमीर क़ज़लबाश
साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन 
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है 
- आल-ए-अहमद सूरूर

कठिन है काम तो हिम्मत से काम ले ऐ दिल
बिगाड़ काम न मुश्किल समझ के मुश्किल को
- वहशत रज़ा अली कलकत्वी
देख ज़िंदाँ से परे रंग-ए-चमन जोश-ए-बहार 
रक़्स करना है तो फिर पाँव की ज़ंजीर न देख 
- मजरूह सुल्तानपुरी

ज़रा दरिया की तह तक तो पहुँच जाने की हिम्मत कर
तो फिर ऐ डूबने वाले किनारा ही किनारा है
- बासित भोपाली

उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है 
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है 
- नफ़स अम्बालवी
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो 
हौसले मुश्किलों में पलते हैं 
- महफूजुर्रहमान आदिल

सिवाए मेरे किसी को जलने का होश कब था
चराग़ की लौ बुलंद थी और रात कम थी
- मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
अपनी ही रवानी में बहता नज़र आता है
ये शहर बुलंदी से दरिया नज़र आता है
- इनाम नदीम

हाँ आसमान अपनी बुलंदी से होशियार
अब सर उठा रहे हैं किसी आस्ताँ से हम
- जोश मलीहाबादी