Tuesday, May 6, 2025

सुनहरे ख़्वाब आँखों में बुना करते थे हम दोनों

 सुनहरे ख़्वाब आँखों में बुना करते थे हम दोनों

परिंदों की तरह दिन भर उड़ा करते थे हम दोनों

इलाही ज़िंदगी यूँही मोहब्बत में गुज़र जाए
नमाज़-ए-फ़ज्र पढ़ कर ये दुआ करते थे हम दोनों

हमेशा ठंडी हो जाती थी चाय बातों बातों में
वो बातें जो इन आँखों से किया करते थे हम दोनों

गुज़र जाता था सारा दिन इकट्ठे सीपियाँ चुनते
समुंदर के किनारे पर रहा करते थे हम दोनों

हवा के एक झोंके से लरज़ जाते दरीचों में
चराग़ों की तरह शब भर जला करते थे हम दोनों

मोहब्बत में कठिन रस्ते बहुत आसान लगते थे
पहाड़ों पर सुहूलत से चढ़ा करते थे हम दोनों

'हसन' रुस्वाई का ख़दशा कभी दिल में नहीं आया
ख़यालों और ख़्वाबों में मिला करते थे हम दोनों

~ हसन अब्बासी

मिले मुझ को ग़म से फ़ुर्सत तो सुनाऊँ वो फ़साना

 मिले मुझ को ग़म से फ़ुर्सत तो सुनाऊँ वो फ़साना

कि टपक पड़े नज़र से मय-ए-इशरत-ए-शबाना

यही ज़िंदगी मुसीबत यही ज़िंदगी मसर्रत
यही ज़िंदगी हक़ीक़त यही ज़िंदगी फ़साना

कभी दर्द की तमन्ना कभी कोशिश-ए-मुदावा
कभी बिजलियों की ख़्वाहिश कभी फ़िक्र-ए-आशियाना

मिरे क़हक़हों की ज़द पर कभी गर्दिशें जहाँ की
मिरे आँसुओं की रौ में कभी तल्ख़ी-ए-ज़माना

मिरी रिफ़अ'तों से लर्ज़ां कभी मेहर-ओ-माह ओ अंजुम
मिरी पस्तियों से ख़ाइफ़ कभी औज-ए-ख़ुसरवाना

कभी मैं हूँ तुझ से नालाँ कभी मुझ से तू परेशाँ
कभी मैं तिरा हदफ़ हूँ कभी तू मिरा निशाना

जिसे पा सका न ज़ाहिद जिसे छू सका न सूफ़ी
वही तार छेड़ता है मिरा सोज़-ए-शाइराना

मुईन अहसन जज़्बी

तेरे चेहरे से नज़र हटाऊँ कैसे

 घाव तो बहुत हैं पर तुझें दिखाऊँ कैसे

अपना बेबस हाल तुझें समझाऊँ कैसे

तूने पूछा था मुझसें मलाल मेरा क्या हैं
रिवायत में बंधे इश्क़ क़ो बतलाऊँ कैसे

उसके नाम के ख़ातिर ज़ज़्बात दफन हैं
मेरी जान क़ो जान कह के बुलाऊँ कैसे

तुझें दिल के मंदिर का राम बना रखा हैं
इश्क़ के सजदे में झुका सर उठाऊँ कैसे

कैसे कह दे, हम अंदर से मर चुके जानाँ
तेरे इश्क़ में ख़ुद क़ो मैं मुर्दा दर्शाऊं कैसे

कृष्णा की चाहत के तुझें आँखों में भरले
अब बता, तेरे चेहरे से नज़र हटाऊँ कैसे

- कृष्णा शर्मा

ज़िंदगी एक तेरा साथ ही जीने की थी

वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिल-ए-खुद-बीन,

आस्मां को ख़ुद अपनी आँखों से देख लेता है.

*

ये जिंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाये जा,

मरने की तमन्रा है तो मर, मरने से न डर जाये जा.

*

इश्क़ ने फिराक़ को बनाया मस्त-ए-ख़ुदा, 

हर ज़रा-ए-ख़ाक में वो जलवा-ए-बे-क़यास है.

*

ज़िंदगी कया है, एक रहस्यमयी सैर-ए-जहां, 

हर क़दम पे इक नया मंज़र, इक नया इम्तिहां.

*

तुझ से बिछड़े तो मालूम हुआ मुझ को थे, 

ज़िंदगी एक तेरा साथ ही जीने की थी.

*

दिल की धड़कन को तूने आवाज़-ए-ख़ुदा कहा,

फिराक़ की शायरी में हर लफ्ज़ है बे-बदा

*

ग़म-ए-दिल सुनाने को हर एक से कहता हूं,

सुनने वाला कोई नहीं, बस ख़ुद से कहता हूं

*

उम्र.गुज़री है इस आस में कि आएगा कोई, 

अब तो बस ख़्वाब ही आते हैं, हक़ीक़त नहीं

*

सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहां,

ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहां

*

सच तो ये है बड़े आराम से कहूँ,

तेरे हर लहज़ा सताने की क़सम




माथे पे पसीना क्यूं आंखों में नमी कैसी

माथे पे पसीना क्यूं आंखों में नमी कैसी, 

कुछ ख़ैर तो ही तुम ने क्या हाल-ए-जिगर देखा.

*

अब इत्र भी मलो तो तकल्लुफ़ की बू कहां, 

वो दिन हवा हुए जो पसीना गुलाब था.

*

मिला-दिया है पसीना भले ही मिट्टी में, 

हम अपनी आंख का पानी बचा के रखते हैं.

*

हलाल रिज़्क़ का मतलब किसान से पूछो,

पसीना बन के बदन से लह्ठ निकलता है.

*

हो गया मिट्टी अगर मेरा पसीना सूख कर,

देखना मेरे दरुख्तों पर समर आ जाएगा.

*

ये पसीना वही आंसू हैं जो पी जाते थे हम, 

न 'आरजू' लो वो खुला भेद वो ट्रटा पानी

*
पसीने से मिरे अब तो ये रूमाल है,
नाज़-ए-उल्फत का ख़ज़ीना है.
*
आंखों का अर्क़ रौगन-ए-बादाम से बेहतर,
आरिज़ का पसीना है गुलाब-ए-गुल-ए-अहमर
*
रुख़ पर पसीना ज़िस्म में रअशा जबीं प चीं,
पूछा किधर चले तो ये बोले कहीं नहीं.






बहाने और भीं होते जो ज़िंदगी के लिए

पारा-ए-दिल है वतन की सरजमी मुश्किल ये है,

शहर को वीरान या इस दिल को वीराना कहे। 

*

अब कारगह-ए-दहर में लगता है बहुत दिल, 

ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है.

*

मेरे ही संग-ओ-ख़िश्त से तामीर-ए-बाम-ओ-दर,

मेरे ही घर को शहर में शामिल कहा न जाए.

*

मुझे ये फिक्र सब की प्यास अपनी प्यास है,

साकी, तुझे ये जिद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से।  

*

सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ,

अपनी कुलाह कज है उसी बाॉँकपन के साथ.

*

ज़बाँ हमारी न समझा यहाँ कोई, 

हम अजनबी की तरह अपने ही वतन में रहे.

*

रोक सकता हमें ज़िदान-ए-बला क्या 'मजरूह',

हम तो आवाज़ हैं दीवार से छन जाते हैं. 

*

अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर, 

अगर है तिश्रगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे.

*

बहाने और भीं होते जो ज़िंदगी के लिए, 

हम एक बार तिरी आरजू भी खो देते.


-मजरूह सुल्तानपुरी

चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

 गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

*

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है

जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है

- बशीर बद्र

*

ज़िंदगी तुझ से हर इक साँस पे समझौता करूँ

शौक़ जीने का है मुझ को मगर इतना भी नहीं

- मुज़फ़्फ़र वारसी

*

ये इल्तिजा दुआ ये तमन्ना फुज़ूल है

सूखी नदी के पास समुंदर न जाएगा

- हयात लखनवी

हम आप की आँखों में इस दिल को बसा दें तो

 हम आप की आँखों में इस दिल को बसा दें तो

हम मूँद के पलकों को इस दिल को सज़ा दें तो

इन ज़ुल्फ़ों में गूंथेंगे हम फूल मोहब्बत के
ज़ुल्फ़ों को झटक कर हम ये फूल गिरा दें तो

हम आप को ख़्वाबों में ला ला के सताएँगे
हम आप की आँखों से नींदें ही उड़ा दें तो

हम आप के क़दमों पर गिर जाएँगे ग़श खा कर
इस पर भी न हम अपने आँचल की हवा दें तो

Sahir Ludhianvi

वो दिल ही क्या तिरे मिलने की जो दुआ न करे

 वो दिल ही क्या तिरे मिलने की जो दुआ न करे

मैं तुझ को भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे

रहेगा साथ तिरा प्यार ज़िंदगी बन कर
ये और बात मिरी ज़िंदगी वफ़ा न करे

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में
ख़ुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे

सुना है उस को मोहब्बत दुआएँ देती है
जो दिल पे चोट तो खाए मगर गिला न करे

अगर वफ़ा पे भरोसा रहे न दुनिया को
तो कोई शख़्स मोहब्बत का हौसला न करे

बुझा दिया है नसीबों ने मेरे प्यार का चाँद
कोई दिया मिरी पलकों पे अब जला न करे

ज़माना देख चुका है परख चुका है इसे

'क़तील' जान से जाए पर इल्तिजा न करे

क़तील शिफ़ाई

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो

 जाने वाले से मुलाक़ात न होने पाई

दिल की दिल में ही रही बात न होने पार्ड

- शकील बदायूंनी

*

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो

वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो

- मोमिन ख़ाँ मोमिन

*

अज़िय्यत मुसीबत मलामत बलाएँ

तिरे इश्क़ में हम ने क्या कया न देखा

- ख़्वाजा मीर दर्द

*
कब हँसा था जो ये कहते हो कि रोना होगा
हो रहेगा मिरी क़िस्मत में जो होना होगा
- अज्ञात