Sunday, January 30, 2022

चार क़दम भी चल ना पाऊंगा मैं

तुम से अलग हो कर
कहां जाऊगी में
मंजिल तो दूर की बात है
चार क़दम भी चल ना पाऊंगी में
तेरा प्यार है
जो समेटे हुए है "मुझे"
जो ना हो तुम साथ
तो
बिखर जाऊगी में
तुम से अलग हो कर...

और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी

और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी 
उस के रहे हो के हम जिस से मोहब्बत न थी 
 
इतने बड़े शहर में कोई हमारा न था 
अपने सिवा आश्ना एक भी सूरत न थी 
 
इस भरी दुनिया से वो चल दिया चुपके से यूँ 
जैसे किसी को भी अब उस की ज़रूरत न थी 
 
अब तो किसी बात पर कुछ नहीं होता हमें 
आज से पहले कभी ऐसी तो हालत न थी 
 
सब से छुपाते रहे दिल में दबाते रहे 
तुम से कहें किस लिए ग़म था वो दौलत न थी 
 
अपना तो जो कुछ भी था घर में पड़ा था सभी 
थोड़ा बहुत छोड़ना चोर की आदत न थी 
 
ऐसी कहानी का मैं आख़िरी किरदार था 
जिस में कोई रस न था कोई भी औरत न थी 
 
शेर तो कहते थे हम सच है ये 'अल्वी' मगर 
तुम को सुनाते कभी इतनी भी फ़ुर्सत न थी 

मोहम्मद अल्वी 

Saturday, December 18, 2021

सर्दी में दिन सर्द मिला

सर्दी में दिन सर्द मिला 


हर मौसम बेदर्द मिला 


ऊँचे लम्बे पेड़ों का 


पत्ता पत्ता ज़र्द मिला 


सोचते हैं क्यूँ ज़िंदा हैं 


अच्छा ये सर-दर्द मिला 


हम रोए तो बात भी थी 


क्यूँ रोता हर फ़र्द मिला 

Tuesday, December 7, 2021

मैं तो वही हूँ

तुमने नही पहचाना, तो क्या हुआ
मै तो अभी भी वही हूँ।
तुम बदल गए, तो क्या हुआ
मै तो अभी भी वही हूँ।
बस! मेरे अल्फाज़ो ने मुझसे कहा,
अब तू बना ऐसी पहचान कि,
लोग कहे कि,अरे! तुम तो वही हो ॥

उसकी मोहब्बत मेरे लिए

उसकी मोहब्बत मेरे लिए नशा
उसका गुस्सा मेरे लिए सजा,
उसकी उड़ती जुल्फें और मेरा कंधा
वो इतनी पावन जैसे कल -कल करती गंगा,

उसकी आंखें दरिया सी गहरी
ओर में मांझी बीच मझधार में फंसी नैया का,
वो बरसाने की राधा गोरी,
और मैं सावला अपनी यशोदा मैया का

वह जैसे कड़कती ठंड में चाय की प्याली सी,
वह जैसे बसंत ऋतु में फैली हरियाली सी,
वह जैसे अमावस की रात में पूनम का चंद्रमा
वह जैसे रोते हुए बच्चे को हसाती प्यारी मां

यह सब पुरानी बात है आज की नहीं
दिल खोल कर सब बोल दिया अब कुछ भी राज नहीं
ऐसा नहीं कि अब उसकी चाहत नहीं मुझे,
पर मेरी मोहब्बत अब उसके इश्क के ताज के मोहताज नहीं

ऐ ज़िन्दगी हम भी किसी के

ऐ ज़िन्दगी हम भी किसी के खास बनना चाहते हैं।
हमारे कन्धे पर सर रख कर कोई खुद को महफूज समझे।
बस किसी के लिए वही जनाब बनना चाहते हैं।
ऐ ज़िन्दगी हम भी किसी के खास बनना चाहते हैं।
जब तन्हाई परेशानी और इस दुनिया की भीड़ से कोई ऊब जाए ।
ऐसे में किसी के लिये शकुन की बरसात बनना चाहते हैं ।
ऐ ज़िन्दगी हम भी किसी के खास बनना चाहते हैं।

तुम्हारी हर बात तुमसे कहेंगे

तुम्हारी हर बात तुमसे कहेंगे,
तुम इश्क करो या नफरत,
हर सितम सहेंगे ।
तुम बदल गए,
यह तुम्हारी फितरत है,
हम कभी नहीं बदला करेंगे ।
दिल है, कोई खिलौना नहीं ,
जो खेला और तोड़ दिया ,
तुम तोड़ते रहो ,
हम जोड़ते रहेंगे ।
अहम तुम मे है,
तो अहम् मुझमें भी है ,
मगर झुकते हैं हम,
क्योंकि इश्क इबादत है ।
क्योंकि इश्क इबादत है ।।

खुदा भी तुझसे नाराज हुआ तो होगा

बिछड़ के मुझसे आंसू तेरा भी गिरा तो होगा 
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उठ-उठ कर रातों में मुझे याद किया तो होगा ।
तेरा दिल धड़कता था मेरे दिल के साथ 
अब तेरा दिल भी तुझसे रुठा तो होगा।
यूँ तो कोई किसी के बिना मरता नहीं है 
लेकिन कुछ दिन तू भी मर-मर के जिया तो होगा।
जो तुमने तोड़ दिया तो करूँ क्या इसका गिला
टुटे दिल को जोड़ के फिर से जीना तो होगा।
सुना है कि मासूम दिल खुदा का घर होता है
फिर तो खुदा भी तुझसे नाराज हुआ तो होगा ।

जरूरी तो नहीं

जीवन रंगीन हो जरूरी तो नहीं,
खुशियाँ बेशुमार हो जरूरी तो नहीं,
सपने सारे पूरे हो जरूरी तो नहीं,
माना लोगो में अंतर बहुत है,
सब हमसे खुश हो जरूरी तो नहीं।

कौन कहता हैं सब अपने नहीं,
मन से साथ में बैठ तो सही,
बहुत कर ली बातें दूसरो से,
एक अपनी आत्मा से करके देख तो सही,
सब हमसे खुश हो जरूरी तो नहीं,

आदमी अनेक, रिश्ते अनेक ,
खून के रिश्तों में परिवर्तन अनेक,
सब के मन से मन मिले जरूरी नहीं,
पर हर बातो को दिल मे रखना जरुरी नहीं,
सब हमसे खुश हो जरूरी तो नहीं।

हा माना तकलीफ होती हैं,
रिश्तो के टूटने पे,
सब कुछ मन का मिल जाये ,
तो शिकायत की जरूरत ही नहीं,
सब हमसे खुश हो जरूरी तो नहीं।

दिल से दिल मिलते हैं,
पर मन से मन मिले जरूरी तो नही,
कुछ बाते मन मे ही अधूरी हो,
हर बातो को बयां कर देना जरूरी तो नही,
सब हमसे खुश हो जरूरी तो नही।