Tuesday, October 15, 2019

राम तुम्हारे युग का रावण, अच्छा था।

राम तुम्हारे युग का रावण, अच्छा था।
दस ते दस चेहरे, सब बाहर रखता था!

ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो

दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
वर्ना कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे

ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो
तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे!

Monday, October 14, 2019

कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया

हम जीते जी मसरूफ़ रहे
कुछ इश्क़ किया, कुछ काम किया
काम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आखिर तंग आ कर हमने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया

~ फैज़ अहमद फैज़

Saturday, October 12, 2019

ख़त्म कुछ देर को दुनिया का झमेला कर दे

ख़त्म कुछ देर को दुनिया का झमेला कर दे
ख़ुद के अन्दर से गुज़रना है अकेला कर दे

डॉ कुमार विश्वास

तुम हो जाता हूँ

अच्छा   ख़ासा   बैठे  बैठे  गुम  हो  जाता  हूँ,
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ!

शजर ढूँड रहे हैं!

अब शाम है तो शहर में, गाँव के परिंदे
रहने के लिए कोई शजर ढूँड रहे हैं!

Friday, October 11, 2019

जिंदगी के हसीं लम्हे इस तरह निकाल देते हैं

"जिंदगी के हसीं लम्हे इस तरह निकाल देते हैं,
जवानी के लुफ्त को बोतल में ढाल देते हैं...!"

जिंदादिल रहिये

ज़िंदा दिल रहिए ज़नाब,
ये चहेरे पे उदासी कैसी,
वक्त तो बीत ही रहा है,
उम्र की ऐसी की तैसी!

इंसान का चेहरा नहीं क़िरदार दिखा दे।

आइना कोई ऐसा बना दे, ऐ ख़ुदा जो,
इंसान का चेहरा नहीं क़िरदार दिखा दे।

जिंदादिल रहिये

ज़िंदा दिल रहिए ज़नाब,
ये चहेरे पे उदासी कैसी,
वक्त तो बीत ही रहा है,
उम्र की ऐसी की तैसी!