Wednesday, January 28, 2026

होगी सफलता क्यों नहीं, कर्तव्य पथ पर दृढ़ रहो

दुख, शोक, जब जो आ पड़े, सो धैर्यपूर्वक सब सहो।

होगी सफलता क्यों नहीं, कर्तव्य पथ पर दृढ़ रहो।

- मैथिलीशरण गुप्त


Friday, January 23, 2026

अब तो तेरी नजर भी कातिल है


इतनी अदाएं कम थीं जो एक और शामिल है,

कातिल सूरत पहले ही थी अब तो तेरी नजर भी कातिल है.

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कातिल सूरत पहले ही थी, अब तो कयामत ढा रही है,

तेरी सादगी भी अब, दिल पर खंजर चला रही है।

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उसकी आँखों में रहूँ या दिल में उतर जाऊं,
उसकी बालों में उलझूं या होठों पे ठहर जाऊं.

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मस्त नज़रों से देख लेना था अगर
तमन्ना थी आज़माने की,
हम तो बेहोश यूँ ही हो जाते क्या 
ज़रूरत थी मुस्कराने की..

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तुम रोको न अपने दीवाने को,
दिल तड़प रहा कुछ सुनने को,
बीते कुछ ख़ास लम्हों को गुनगुनाने को,
कुछ याद आने को कुछ याद दिलाने को.

*

घीरे से तुम्हें मुस्कुराते देखा है,
दिल से तुम्हे अपना कर देखा है.
जिंदगी खिलखिलाने लगती है मेरे,
कुछ लम्हें तुम्हारे साथ बिता कर देखा है.

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मुझे नहीं मालूम तारीफ का हुनर बस ये जान लो तुम। 
मेरी नज़रों में सबसे खूबसूरत हो तुम। 
मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी जरुरत हो तुम..

...


आपकी हर एक अदा है दिल चुराने की,
तमना है हमारी इस अदा को दिल में बसाने की,
चाँद सा है चेहरा है आपका 
और हमारी ख्वाहिश है उस चाँद को पाने की..

Saturday, January 17, 2026

दर्द भी अपना है और दर्द देने वाला भी

​मलाल नहीं दर्द की इन्तेहाँ से ,

दर्द भी अपना है और दर्द देने वाला भी ...


तुम ने देखा एक नज़र और दिल तम्हारा हो गया

​हम ने पाला मुद्दतों पहलू में, हम कुछ भी नहीं

तुम ने देखा एक नज़र और दिल तम्हारा हो गया

आसी राम नगरी

आंखों की झील में जो उतरे नहीं कभी

​गहरे समंदरों की भला क्या खबर उन्हें..

आंखों की झील में जो उतरे नहीं कभी ।।

Friday, January 16, 2026

किताबों में नहीं था वो सबक सिखाया ज़माने ने

पन्नों की तरह दिन बदलते जा रहे हैं,

खबर नहीं है कि आ रहे हैं या जा रहे हैं । 

बहुत कुछ सिखाया जिंदगी ने अनजाने में,

किताबों में नहीं था वो सबक सिखाया ज़माने ने। 

Friday, January 9, 2026

कुछ पल साथ में बहने दो तुम

ज़रा से फासले रहने दो तुम।

बात दिल की कहने दो तुम।

माना दो किनारों की तरह है

कुछ पल साथ में बहने दो तुम।

इश्क़ किया है तो दर्द तो होगा

थोड़ा इसको ज़रा सहने दो तुम।

आंसू,आंहे और टूटे हुए ख्वाब

मोहब्बत के मुझे गहने दो तुम।

सजना संवरना तेरा बिजली गिरा गया

सजना संवरना तेरा ,बिजली गिरा गया।

रूप तेरा सलौना ,मेरे दिल को भा गया।

ढूंढे से भी नहीं मिलता ,चैन मेरे दिल को
ढूंढूं ग़र दिल ,तो भी जाने कहां गया।

बार बार पलकों को तेरा गिरा कर उठाना,
दीवाने को ये और दीवाना बना‌ गया ।

जुल्फों का लहराना जैसै काली घटा छाये
दिल मेरा ,तेरा होकर कर मुझसे दगा गया

जाते हुये मुड़ मुड़ कर वो देखना तेरा
बोलूं तो दो बोतल का कर वो नशा गया।

Saturday, December 27, 2025

सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से

“सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से,

ये घटती-बढ़ती रहती हैं वीरों की शमशीरों से.

(कवि बलवीर सिंह करुण) 


सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से,

ये घटती-बढ़ती रहती हैं वीरों की शमशीरों से।

Wednesday, December 24, 2025

उन्हें अब शायद याद कुछ आती नहीं मेरी

उन्हें अब शायद याद कुछ आती नहीं मेरी।

लगता है चाहत के दिन अब पूरे हो चले।