आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
पन्नों की तरह दिन बदलते जा रहे हैं,
खबर नहीं है कि आ रहे हैं या जा रहे हैं ।
बहुत कुछ सिखाया जिंदगी ने अनजाने में,
किताबों में नहीं था वो सबक सिखाया ज़माने ने।
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