इतनी अदाएं कम थीं जो एक और शामिल है,
कातिल सूरत पहले ही थी अब तो तेरी नजर भी कातिल है.
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कातिल सूरत पहले ही थी, अब तो कयामत ढा रही है,
तेरी सादगी भी अब, दिल पर खंजर चला रही है।**
उसकी आँखों में रहूँ या दिल में उतर जाऊं,
उसकी बालों में उलझूं या होठों पे ठहर जाऊं.
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मस्त नज़रों से देख लेना था अगर
तमन्ना थी आज़माने की,
हम तो बेहोश यूँ ही हो जाते क्या
ज़रूरत थी मुस्कराने की..
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तुम रोको न अपने दीवाने को,
दिल तड़प रहा कुछ सुनने को,
बीते कुछ ख़ास लम्हों को गुनगुनाने को,
कुछ याद आने को कुछ याद दिलाने को.
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घीरे से तुम्हें मुस्कुराते देखा है,
दिल से तुम्हे अपना कर देखा है.
जिंदगी खिलखिलाने लगती है मेरे,
कुछ लम्हें तुम्हारे साथ बिता कर देखा है.
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मुझे नहीं मालूम तारीफ का हुनर बस ये जान लो तुम।
मेरी नज़रों में सबसे खूबसूरत हो तुम।
मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी जरुरत हो तुम..
...
आपकी हर एक अदा है दिल चुराने की,
तमना है हमारी इस अदा को दिल में बसाने की,
चाँद सा है चेहरा है आपका
और हमारी ख्वाहिश है उस चाँद को पाने की..
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