ज़रा से फासले रहने दो तुम।
बात दिल की कहने दो तुम।
माना दो किनारों की तरह है
कुछ पल साथ में बहने दो तुम।
इश्क़ किया है तो दर्द तो होगा
थोड़ा इसको ज़रा सहने दो तुम।
आंसू,आंहे और टूटे हुए ख्वाब
मोहब्बत के मुझे गहने दो तुम।
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
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