Saturday, December 27, 2025

सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से

“सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से,

ये घटती-बढ़ती रहती हैं वीरों की शमशीरों से.

(कवि बलवीर सिंह करुण) 


सीमा नहीं बना करतीं हैं काग़ज़ खींची लकीरों से,

ये घटती-बढ़ती रहती हैं वीरों की शमशीरों से।

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