Friday, February 14, 2025

पड़ ही जाती है रुख़-ए-यार पे हसरत की नज़र- हसरत मोहानी शायरी

 1. चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह


मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है.


2. ऐसे बिगड़े कि फिर जफ़ा भी न की


दुश्मनी का भी हक़ अदा न हुआ


3. छुप नहीं सकती छुपाने से मोहब्बत की नज़र


पड़ ही जाती है रुख़-ए-यार पे हसरत की नज़र


4. देखा किए वो मस्त निगाहों से बार बार


जब तक शराब आई कई दौर हो गए


5. जो और कुछ हो तिरी दीद के सिवा मंज़ूर


तो मुझ पे ख़्वाहिश-ए-जन्नत हराम हो जाए


6. आप को आता रहा मेरे सताने का ख़याल


सुलह से अच्छी रही मुझ को लड़ाई आप की


7. चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है


हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है


8. इक़रार है कि दिल से तुम्हें चाहते हैं हम


कुछ इस गुनाह की भी सज़ा है तुम्हारे पास


9. मालूम सब है पूछते हो फिर भी मुद्दआ'


अब तुम से दिल की बात कहें क्या ज़बाँ से हम


10. वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ


मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ


11. शेर दर-अस्ल हैं वही 'हसरत'


सुनते ही दिल में जो उतर जाएँ


12. आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न


आया मेरा ख़याल तो शर्मा के रह गए


13. छुप नहीं सकती छुपाने से मोहब्बत की नज़र


पड़ ही जाती है रुख़-ए-यार पे हसरत की नज़र


14.आरज़ू तेरी बरक़रार रहे


दिल का क्या है रहा रहा न रहा


15. उस ना-ख़ुदा के ज़ुल्म ओ सितम हाए क्या करूँ


कश्ती मिरी डुबोई है साहिल के आस-पास


16. शाम हो या कि सहर याद उन्हीं की रखनी


दिन हो या रात हमें ज़िक्र उन्हीं का करना


17. हम क्या करें अगर न तिरी आरज़ू करें


दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या


18. देखा किए वो मस्त निगाहों से बार बार


जब तक शराब आई कई दौर हो गए


19. फिर और तग़ाफ़ुल का सबब क्या है ख़ुदाया


मैं याद न आऊँ उन्हें मुमकिन ही नहीं है


20. बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी


बादल जो नज़र आए बदली मेरी नीयत भी


21. आप को आता रहा मेरे सताने का ख़याल


सुलह से अच्छी रही मुझ को लड़ाई आप की

मिरे महबूब सताने के लिए आ

 दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग

तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो


वही होगा जो हुआ है जो हुआ करता हैं

मैं ने इस प्यार का अंजाम तो सोचा भी नहीं


हम कुछ नहीं कहते हैं कोई कुछ नहीं कहता

तुम क्या हो तुम्हीं सब से कहलवाए चलो हो


दर्द ऐसा है कि जी बाहे है जिंदारहिए

ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है


दिल की बाज़ी लगे फिर जान की बाज़ी लग जाए

इश्क़ में हार के बैठो नहीं हारे जाओ


अब लुत्फ़ इसी में है मज्ञा है तो इसी में

आ ऐ मिरे महबूब सताने के लिए आ


दिल दर्द की भट्टी में कई बार जले है

तब एक ग़ज़ल हस्र के सांचे में ढले है


हम को तो खैर पहुंचना था जहां तक पहुँचे

जो हमें रोक रहे थे वो कहां तक पहुंचे

तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

ये मौसम भी बदल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ


मुझे ग़म है कि मैं ने ज़िंदगी में कुछ नहीं पाया

ये ग़म दिल से निकल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ


ये दुनिया-भर के झगड़े घर के क़िस्से काम की बातें

बला हर एक टल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ


नहीं मिलते हो मुझ से तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे

ज़माना मुझ से जल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

जावेद अख़्तर

दीवाना शायरी - कुमार विश्वास

 1. सारे गुलशन में तुझे ढूँढ के मैं नाकारा,


अब हर इक फूल को ख़ुद अपना पता देता हूँ,

कितने चेहरों में झलक तेरी नज़र आती है,


कितनी आँखों को मैं बेबात जगा देता हूँ


2. कितना मुश्किल है ख़ुद को ही ख़ुद के


दिल की सीपी में ढाल कर रखना


आप के पास तो लाखों होंगे


मेरे वाला सँभाल कर रखना...!


3. हमें क्या ग़म है ये ग़म को पता न चला,


हमारी चश्म-ए-नम को पता न चला,


किसी के आने की हम को ख़बर न हुई,


किसी के जाने का हम को पता न चला


4. तुम्हीं पे मरता है ये दिल, अदावत क्यों नहीं करता


कई जन्मों से बंदी है, बग़ावत क्यों नहीं करता


कभी तुमसे थी जो, वो ही शिकायत है ज़माने से


मेरी तारीफ़ करता है, मुहब्बत क्यों नहीं करता


5. नहीं कहा जो कभी, ख़ामख़ा समझती है


जो चाहता हूँ मैं कहना कहाँ समझती है?


सब तो कहते थे ताल्लुक में इश्क़ के अक्सर


आँख को आँख, ज़बाँ को ज़बाँ समझती है


6. चंद चेहरे लगेंगे अपने से,


ख़ुद को पर बेक़रार मत करना,


आख़िर में दिल्लगी लगी दिल पर,


हम न कहते थे प्यार मत करना


Kumar Vishwas Shayari Love

7. गीत ढला जब पोर-पोर ने पीड़ा को जपना समझा


ख़ुद का दर्द सहज गया तो दुनिया ने अपना समझा


शाल-दुशालों में लिपटा यह अक्षर जीवन कविता का


हमने नींद बेचकर पाया दुनिया ने सपना समझा


8. आप की दुनिया के बेरंग अँधेरों के लिए


रात भर जाग कर एक चॉंद चुराया मैंने


रंग धुँधले हैं तो इनका भी सबब मैं ही हूँ


एक तस्वीर को क्यूँ इतना सजाया मैंने


9. तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो


दूरी है, समझता हूँ,


तुम्हारे बिन मेरी हस्ती


अधूरी है, समझता हूँ,


तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये


मुमकिन है नहीं, लेकिन


तुम्हीं को भूलना सबसे


ज़रूरी है, समझता हूँ


10. नेकियों का सिला बदी में मिले,


और शोहरत की कमाई क्या है,


इस बुलंदी पे आ के जाना है,


अच्छा होने में बुराई क्या है


11. एक ख़ामोश हलचल बनी ज़िंदगी


गहरा ठहरा हुआ जल बनी ज़िंदगी


तुम बिना जैसे महलों में बीता हुआ


उर्मिला का कोई पल बनी ज़िंदगी


12. तू मगर मैं तेरे पास हूँ


दिल है गर तू तो दिल का मैं एहसास हूँ


प्रार्थना या इबादत या पूजा कोई


भावना है अगर तू मैं विश्वास हूँ


तुम्हारा प्यार लड्डुओं का थाल है


जिसे मैं खा जाना चाहता हूँ


तुम्हारा प्यार एक लाल रूमाल है


जिसे मैं झंडे-सा फहराना चाहता हूँ


तुम्हारा प्यार एक पेड़ है


जिसकी हरी ओट से मैं तारों को देखता हूँ


तुम्हारा प्यार एक झील है


जहाँ मैं तैरता हूँ और डूबा रहता हूँ


13. अब कोई और न धोखा देगा


इतनी उम्मीद तो वापस कर दे


हम से हर ख़्वाब छीनने वाले


हमारी नींद तो वापस कर दे


Kumar Vishwas Shayari in Hindi

14. जो किए ही नहीं कभी मैंने


वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं


मुझसे फिर बात कर रही है वो


फिर से बातों में आ रहा हूँ मैं


15. नज़र अक्सर शिकायत आजकल करती है दर्पण से,


थकन भी चुटकियाँ लेने लगी है तन से और मन से,


कहाँ तक हम संभाले उम्र का हर रोज़ गिरता घर,


तुम अपनी याद का मलबा हटाओ दिल के आँगन से..!


16. मैं अपने गीत-ग़ज़लों से उसे पैग़ाम करता हूँ


उसी की दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूँ


हवा का काम है चलना, दिए का काम है जलना


वो अपना काम करती है, मैं अपना काम करता हूँ


17. हर एक कपड़े का टुकड़ा माँ का आंचल हो नहीं सकता,


जिसे दुनिया को पाना है वो पागल हो नहीं सकता,


जफाओं की कहानी जब तलक इसमें न शामिल हो,


मुहब्बत का कोई किस्सा मुकम्मल हो नहीं सकता..।


18. फिर मेरी याद आ रही होगी


फिर वो दीपक बुझा रही होगी


फिर मेरे फेसबुक पर आकर वो


खुद को बेनर बना रही होगी


19. मेरी आँखों में रोशन है जो वीरानी, तुम्हारी है


बिछुड़ कर तुम से जिंदा हूँ ये हैरानी, तुम्हारी


मेरी हर सांस में लय है तुम्हारे दर्द की मुश्किल,


मगर इस दर्द की हर एक आसानी, तुम्हारी है


20. मॉंग मुझ से है ख़ास दुनिया की


लफ़्ज़ मेरे हैं आस दुनिया की


क़तरा-क़तरा है शायरी मेरी


दरिया-दरिया है प्यास दुनिया की


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21. कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है


मगर धरती की बैचेनी को बस बादल समझता है


मै तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है


यह तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है


22. ये तेरी बेरुख़ी की हम से आदत ख़ास टूटेगी,


कोई दरिया न ये समझे कि मेरी प्यास टूटेगी,


तेरे वादे का तू जाने मेरा वो ही इरादा है,


कि जिस दिन साँस टूटेगी उसी दिन आस टूटेगी


23. पुराने दोस्त जमे हैं मुंडेर पर छत की,


ये शाम रात से पहले ढली-ढली सी लगे,


तुम्हारा ज़िक्र मिला है नरम हवा के हाथ,


हमें ये जाड़े की आमद भली-भली सी लगे


24. ताल को ताल की झंकृति तो मिले


रूप को भाव की अनुकृति तो मिले


मैं भी सपनों में आने लगूँ आपके


पर मुझे आपकी स्वीकृति तो मिले


25. एक-दो रोज़ में हर आँख ऊब जाती है


मुझ को मंज़िल नहीं, रस्ता समझने लगते हैं


जिन को हासिल नहीं वो जान देते रहते हैं


जिन को मिल जाऊँ वो सस्ता समझने लगते हैं


26. रंग दुनिया ने दिखाया है निराला, देखूँ


हो अँधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ


आईना रख दे मेरे हाथ में, आख़िर मैं भी


कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखूँ


27. तिरे माथे पे ये आँचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन


तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था


28. ज़ख्म भर जाएंगे, तुम मिलो तो सही


दिन सँवर जाएंगे, तुम मिलो तो सही


रास्ते में खड़े दो अधूरे सपने


एक घर जाएंगे, तुम मिलो तो सही


29. मैं ज़माने की ठोकर ही खाता रहूँ


तुम ज़माने को ठोकर लगाती रहो


जि़ंदगी के कमल पर गिरूँ ओस-सा


रोष की धूप बन तुम सुखाती रहो


Love Shayari 


30. एक दो दिन में वो इकरार कहाँ आएगा


हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा


आज जो बाँधा है इनमें तो बहल जायेंगे


‪रोज़ इन बाँहों का त्यौहार कहाँ आएगा


31. तुम्हारा ख्वाब जैसे ग़म को अपनाने से डरता है


हमारी आँख का आँसू, खुशी पाने से डरता है


अजब है लज़्ज़ते ग़म भी जो मेरा दिल अभी, कल तक


तेरे जाने से डरता था, वो अब आने से डरता है..!


32. इक अधूरी जवानी का क्या फ़ायदा?


बिन कथानक कहानी का क्या फ़ायदा?


जिसमें धुलकर नज़र भी न पावन बनें,


आँख में ऐसे पानी का क्या फ़ायदा...!


33. महफ़िल महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है


ख़ुद ही ख़ुद को समझाना तो पड़ता है


उसकी आँखों से हो कर दिल तक जाना


रस्ते में ये मयख़ाना तो पड़ता है


34. चाँद को इतना तो मालूम है, तू प्यासी है,


तू भी अब उसके निकलने का इंतज़ार न कर,


भूख गर ज़ब्त से बाहर हो तो कैसा रोज़ा,


इन गवाहों की ज़रुरत पे मुझे प्यार न कर...!


35. बात करनी है बात कौन करे


दर्द से दो-दो हाथ कौन करें


हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं


चांद ना हो तो रात कोंन करें


जिंदगी भर की कमाई तुम थे


इससे ज्यादा जकात कोन करें


-कुमार विश्वास

क्या खूबी को अब मैं ऐब कर लूं

अब नहीं है हम चिरागों के मोहताज,

उसकी आंखें महफिले रोशन करती हैं,

मै किताबें फिर से अलमारी मे रख आया हूं,

सुना है वह बा कमाल इंसान पढ़ती है।

-

हर जगह बड़े मायूस से चेहरे नजर आ रहे हैं,

लगता है अब उसने सजना बंद कर दिया है।

-

कुछ रास्ता लिख देगा,

कुछ मैं लिख दूंगा

वो लिखते जाएंगे मुश्किल,

मैं मंजिल लिख दूंगा।

-

कितना दिल दुखाओगे बस करो

ये काला काजल लगाना बस करो

'एक बार अगर देख लीं जुल्फे खुली किसी ने,

मर जायेंगे कई, सुनो बाल बांध लो।

-

मैं फरेब से फरेब कर लूं

तेरे बाद खुद को कैद कर लूं

तुझे भी इश्क था मेरी इस लिखाई से

क्या खूबी को अब मैं ऐब कर लूं?

-

बिन बताये उसने क्यों ये दूरी कर दी,

बिछड़कर उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी,

मेरे मुकदर में गम आये तो क्या हुआ,

खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।

-

आसान सा कुछ करना होता तो पहाड़ तोड़ लेते,

हम तो कमबख्त इश्क करना था।

-

वो राज की तरह मेरी बातों में था,

जुगनू जैसे मेरी काली रातों में था,

किस्सा क्या सुनाऊ तुम्हें कल रात का,

सितारों की भीड़ में, वो चांद मेरे हाथों में था।

-

वो मुझे दूर करने की ज़िद लिए बैठा है,

साथ चलना नहीं है मंजिल का वादा कर बैठा है,

मुझे मोहब्बत है समंदर की उन लहरों से,

और मेरा महबूब पहाड़ों को दिल दिए बैठा है।

-

वो जुल्फों से दिन में रातें करती है,

उनकी आंखे ताउम्र की वादे करती है,

भरती है आहें हमारी आवाज को छूकर,

वो बस मुसकुरा के बरसा के करती है।

-

सिरहाना खाली मुझे याद तेरी आ रही है,

भूख मर चुकी है, फिकर तेरी खा रही है।

--मुनव्वर फारुखी


सवाल गुम जवाब गुम बड़ी हसीन रात थी - सुदर्शन फ़ाकिर

 चराग़-ओ-आफ़ताब गुम बड़ी हसीन रात थी

शबाब की नक़ाब गुम बड़ी हसीन रात थी


मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शम' बुझ गई

गिलास गुम शराब गुम बड़ी हसीन रात थी


लिखा था जिस किताब में कि 'इश्क़ तो हराम है

हुई वही किताब गुम बड़ी हसीन रात थी


लबों से लब जो मिल गए लबों से लब ही सिल गए

सवाल गुम जवाब गुम बड़ी हसीन रात थी.

-

सुदर्शन फ़ाकिर

इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता

अब तो ये भी नहीं रहा एहसास

दर्द होता है या नहीं होता

इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा
आदमी काम का नहीं होता

टूट पड़ता है दफ़अ'तन जो इश्क़
बेश-तर देर-पा नहीं होता

वो भी होता है एक वक़्त कि जब
मा-सिवा मा-सिवा नहीं होता

हाए क्या हो गया तबीअ'त को
ग़म भी राहत-फ़ज़ा नहीं होता

दिल हमारा है या तुम्हारा है
हम से ये फ़ैसला नहीं होता

जिस पे तेरी नज़र नहीं होती
उस की जानिब ख़ुदा नहीं होता

मैं कि बे-ज़ार उम्र भर के लिए
दिल कि दम-भर जुदा नहीं होता

वो हमारे क़रीब होते हैं
जब हमारा पता नहीं होता

दिल को क्या क्या सुकून होता है
जब कोई आसरा नहीं होता

हो के इक बार सामना उन से

फिर कभी सामना नहीं होता

-

जिगर मुरादाबादी

फैज अहमद फैज शायर Faiz Ahmad Faiz Shayari

 'मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरे महबूब न मांग/

और भी दुख हैं जमाने में मुहब्ब्त के सिवा/

राहते और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा.'

-

‘हम जीते जी मसरूफ रहे/

कुछ इश्क किया कुछ काम किया.

-

लाजिम है कि हम भी देखेंगे/

वे दिन कि जिसका वादा है/

जो लौह-ए-अजल में लिक्खा है/

जब जुल्म-ओ सितम के कोह-ए-गिरां/

रूई की तरह उड़ जायेंगे…’

-

‘गुलों में रंग भरे बादे नौबहार चले/

चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले.’

-

‘अब जुल्म की मियाद के दिन थोड़े हैं/

इक जरा सब्र कि फरियाद के दिन थोड़े हैं.’

-

‘ये दाग-दाग उजाला ये शब गजीदा सहर/

वे इंतिजार था जिसका ये वो सहर तो नहीं/

ये वो सहर तो नहीं जिसकी आरजू लेकर/ 

चले थे यार कि मिल जायेगी कहीं न कहीं/ 

फलक के दश्त में आखिरी मंजिल…’

-

 ‘आपकी याद आती रही रात भर/

चांदनी दिल दुखाती रही रात भर/

कोई खुशबू बदलती रही पैरहन/

कोई तस्वीर गाती रही रात भर.’ 

-

‘तुम्हारी याद के जब जख्म भरने लगते हैं/ 

किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं.’

-

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

-

वो आ रहे हैं वो आते हैं आ रहे होंगे

शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने

-

जानता है कि वो न आएँगे

फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल



-फैज अहमद फैज
















तेरा नाम, मेरे नाम के साथ

 कितना अच्छा लगता है तेरा नाम, मेरे नाम के साथ,

जैसे खूबसूरत सुबह जुड़ी हो, हसीन शाम के साथ.

Tuesday, February 11, 2025

कौन सी चीज़ तुझे तुझ से जुदा पेश करूँ

 मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में भी तू

कौन सी चीज़ तुझे तुझ से जुदा पेश करूँ

- साहिर लुधियानवी