Thursday, August 24, 2017

जिंदगी सी होती है

Kabhi kabhi in ankho main nami se hoti hai,
Kabhi kabhi in honto pe hansi si hoti hai.
Ae dost woh tumhi ho 
जिससे,
meri zindgi, zindgi si hoti hai.. 😘

बाकी रह गया

मिट गये सब ज़ख्म,
बस निशांँ बाकी रह गया!
सज़ा मुकम्मल हो गयी,
करना गुनाह बाकी रह गया।

कदम

कदम यूँ ही डगमगा गए रास्ते में,
वैसे संभलना हम भी जानते थे!
ठोकर लगी हमें उस पत्थर से,
जिसे हम कभी अपना मानते थे!!

इन्तहाँ कहाँ तक है

ना पूछ, मेरे सब्र की इन्तहाँ कहाँ तक है,
कर ले तू सितम, तेरी हसरत जहाँ तक है!
वफ़ा की उम्मीद जिन्हें होगी, उनको मुबारक,
हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक है!!

चाहत सी हो गई है

उसके साथ रहते रहते, उससे चाहत सी हो गई है,
उससे बात करते करते, उसकी आदत सी हो गई है!
एक पल ना मिलो तो, बेचैनी सी लगती है,
दोस्ती निभाते निभाते उससे, मोहब्बत सी हो गई है!

होठों की नमी चुरा लूँ

तेरे पंखुड़िओ जैसे होठों की नमी को चुरा लूँ,
तेरी ज़ुल्फों की साए में खुद को छुपा लूँ!
तेरे बदन की खुशबू में बस अब नहा लूँ,
गर फिर भी चैन ना आये, तो ये सब दुहरा लूँ!!

Sunday, August 7, 2016

गुज़रा हुआ कल


*"काश फिर मिलने की वजह मिल जाए!*
*"साथ जितना भी बिताया वो पल मिल जाए!*
*"चलो अपनी अपनी आँखें बंद कर लें!*
*"क्या पता ख़्वाबों में गुज़रा हुआ कल मिल जाए!*


Saturday, January 23, 2016

वो था सुभाष....


वो था सुभाष, वो था सुभाष

वो भी तो खुश रह सकता था

महलों और चौबारों में

उसको लेकिन क्या लेना था

तख्तो-ताज-मीनारों से?



वो था सुभाष, वो था सुभाष

अपनी मां बंधन में थी जब

कैसे वो सुख से रह पाता

रणदेवी के चरणों में फिर

क्यों ना जाकर शीश चढ़ाता?



अपना सुभाष, अपना सुभाष

डाल बदन पर मोटी खाकी

क्यों न दुश्मन से भिड़ जाता

'जय-हिन्द' का नारा देकर

क्यों न अजर-अमर हो जाता?



नेता सुभाष, नेता सुभाष

जीवन अपना दांव लगाकर

दुश्मन सारे खूब छकाकर

कहां गया वो, कहां गया वो

जीवन-संगी सब बिसराकर?



तेरा सुभाष, मेरा सुभाष

मैं तुमको आजादी दूंगा

लेकिन उसका मोल भी लूंगा

खूं बदले आजादी दूंगा

बोलो सब तैयार हो क्या?



गरजा सुभाष, बरसा सुभाष

वो था सुभाष, अपना सुभाष

नेता सुभाष, बाबू सुभाष

तेरा सुभाष, मेरा सुभाष

अपना सुभाष, अपना सुभाष।