तेरे पंखुड़िओ जैसे होठों की नमी को चुरा लूँ,
तेरी ज़ुल्फों की साए में खुद को छुपा लूँ!
तेरे बदन की खुशबू में बस अब नहा लूँ,
गर फिर भी चैन ना आये, तो ये सब दुहरा लूँ!!
Showing posts with label ज़ुल्फ. Show all posts
Showing posts with label ज़ुल्फ. Show all posts
Thursday, August 24, 2017
होठों की नमी चुरा लूँ
Subscribe to:
Posts (Atom)