Thursday, August 24, 2023

दिल के खिलौने टूटकर बिखरते हैं

हमेशा ही दिल के खिलौने टूटकर बिखरते हैं

कुछ गलतफामियों में होकर, कुछ मोहब्बतों में 
कभी आँसुओं के कतरे, छुपाएँ जाते हैं 
कभी इस तरह के दिल्लगी में, बताएँ जाते हैं 
अलग होने के रास्ते, बाहों में ढूँढे जाते हैं 
कभी कर्ज़ होंठों पे रखकर, जुदा हो जाते हैं 
हमेशा ही गम के मौसम आते हैं 
कभी खुशी होती है, 
कभी धूल बनके उड़ती है 
इस सफ़र में सूरज पिघला है, आसमाँ रूठा है 
जला है इश्क, हवाएँ झूठी है इस दर्द में... 
सब चुप है, मालिक चुप हैं, ये दुनिया चुप है 
कोई टिके नहीं मोहब्बतों में, धूप के रेशमी धागों पे 
ऐ घटता बढ़ता पारा हैं, कोई मेरा न सहारा हैं 
थोड़े में बहुत, ज्यादे में कम हैं, 
कैसे पेश आएँ वो, जो उड़ता हुआ गम हैं 
हमेशा ही ऐ चेहरे नए से पुराने होते हैं 
हमेशा ही ऐ अल्फाजों के तराने होते हैं 

मुझे बिखरा हुआ पाओगी

रात के अंधेरे में खोया हुआ पाओगी।

ढूंढना कभी तुम मुझे धड़कने सताएंगी।। 

हम न मिलें तो चिराग़ जला लेना तुम। 
पूछना चिरागों से किताबें नजर आयेंगी।। 
अगर आवाज दे कोई खोल कर देख लेना। 
तन्हा हो अभी तुम खामोशी भी रुलाएगी।। 
लगे धूल हाथों में कोई निशान बना देना। 
बेताबी दिल में आंसुओं से भीग जाओगी।। 
जाना तुम चिराग़ के पास लौ को देखना। 
रखना तुम हाथ मुझे जलती हुई पाओगी।। 
आएगी याद तो पत्थर दिल बना लेना। 
देखोगी आईना मुझे बिखरा हुआ पाओगी।। 

भूल की है

ऐ दिल ए ख्वाब यारी तुमसे कर के बेकरारी अपनी ही बढ़ा दी मैने सच ये कि अकेले रहने की सजा कबूल की है

तूने भी इंतजार के मेरे लम्हें बढ़ा कर दर्द शुमार किया है दिल भी कहता है हमने तुझे समझने में ही भूल की है 
न जाने कौन सा लम्हा करार का रहा है ये न जाना हमने कभी सच तो ये हमने भी तुझे समझने में ही भूल की है 
न जाने क्या सोच के दिल ने इंतजार तेरा कबूल किया है अपने दिल पे ऐतबार कर के हमेशा मैंने ही भूल की है 
तुमने भी क्या सोच के अपनी नज़रों में कैद किया है दिल भी कह रहा है बार बार खता समझने में ही भूल की है 

ये हैं मेरे आठ पहर

एक पहर खुली आंखों से

सपना तुम्हारा 
अगले पहर यादों की 
झांकियाँ, 
एक पहर शुद्ध लिखता 
जाता तुम्हें 
अगले पहर ढूंढू उसमें 
गलतियाँ। 

एक पहर तुम्हें पढ़कर 
खुश होता 
अगले पहर अपनी तेज धड़कनें 
गिनता मैं, 
एक पहर मन की गहराई में 
ले जाता तुम्हें 
अगले पहर वहीं बसाने तुम्हें 
सोचता मैं। 

ये हैं मेरे आठ पहर 
अब इससे ज्यादा क्या मैं करूं 
क्या तेरी ही याद में लिप्त रहूँ 
या फिर अगले आठ भी ऐसे करूं।। 

इश्क़ में रूठना-मनाना तो

ये ज़रूरी तो नहीं है वजह हर बात की हो,

इश्क़ में रूठना-मनाना तो जवाज़ भी है। 

मगर वो याद रहती है

मुझे कॉलेज की एक लड़की

हमेशा याद रहती है। 
मैं सब कुछ भूल जाता हूँ 
मगर वो याद रहती है।। 

मैं रखता था कदम दहलीज पर, 
जब क्लास में अपने। 
कदम मेरे बहकते थे, 
पलक उसकी फड़कती थी।। 

कहूं क्या प्यार शायद था नदी, 
के दो किनारों सा। 
यहां पर मैं तड़पता था, 
वहां पर वो तड़पती थी।। 

हुए हैं आज तक दो साल 
उससे न मिला फिर मैं, 
मगर दिल कह रहा है वो 
अभी भी याद करती है।। 

मैं दिल की धड़कनों को, 
अब उसीकेे नाम कर दूंगा। 
कोई आकर बता दे अब , 
कहा वो आज रहती है।। 

होंगी राहें आसान

होंगी राहें आसान

इंतजार तो कर 
आँचल में 
संघर्ष तो भर 
टुटा पतवार तो क्या 
नीड़ फिर बनेगें, 
बादल फिर छायेंगे 
तू बांध बांध मजबूत कि 
भू - प्रमाण बने , 
सफलता मिले ना मिले 
संघर्ष प्रतिमान बने 
तू नौकर बने ना बने महान बने 
हार कर उठ 
हर बार उठ कर चल 
ताकि जहान से तू नहीं 
जहान तुमसे बने।।

मुझे ये फूल न दे तुझ को दिलबरी की क़सम

मुझे ये फूल न दे तुझ को दिलबरी की क़सम 

ये कुछ नहीं तिरे होंठों की ताज़गी की क़सम

नज़र हसीं हो तो जल्वे हसीन लगते हैं


मैं कुछ नहीं हूँ मुझे मेरे हुस्न ही की क़सम

तू एक साज़ है छेड़ा नहीं किसी ने जिसे


तिरे बदन में छुपी नर्म रागनी की क़सम

ये रागनी तिरे दिल में है मेरे तन में नहीं


परखने वाले मुझे तेरी सादगी की क़सम

ग़ज़ल का लोच है तू नज़्म का शबाब है तू


यक़ीन कर मुझे मेरी ही शायरी की क़सम 

Sahir Ludhianvi

जबसे जिंदगी में तू शामिल हुई है

जबसे जिंदगी में तू शामिल हुई है,

जिंदगी तेरी ही बात करती है। 
तेरे नाम से दिन शुरू होता है, 
तेरे ख्वाबों से मेरी रात होती है। 

मैंने देखें हैं हसीन रंगीन सपने, 
ये जिंदगी मेरी अब गुनगुनाती है। 
तेरे संग होंगे पूरे अरमान दिल के, 
हर पल तू मेरी आँखों में रहती हैै। 

मेरे घर के सूने-सूने आँगन में, 
तेरे आने से लगता है बहार आई है। 
जिक्र करते हैं लोग अपने नसीब का, 
मेरा नसीब तो तू बन कर आई है।

याद है मुझे आज भी

याद है मुझे आज भी

मेरा वो पहला प्यार 
स्कूल का बड़ा सा मैदान 
दिवस था वो सोमवार 

खेल रही थी तुम 
सखियों संग आंख मिचौली 
खिलखिलाते देख तुम्हें 
मन में समा गई सूरत अति भोली 

फिर तो मिलना हुआ कई बार 
आंखों ही आंखों में 
एक दूजे के लिए 
प्यार था बेशुमार 

वादा न भूलने भुलाने का किया 
मुहब्बत की डोर से बंधे रहेंगे सदा 
फिर उस अशुभ घड़ी में कर विष पान 
क्यों हो गई मुझसे तुम यूं जुदा 

अभी तलक हूं असमंजस में 
बिन संवाद तुम हो गई शांत 
कैसे करूं प्यार का इजहार 
मन अब भी रहता है अशांत