वहशी नहीं हूँ मैं न कोई बदहवास हूँ,
महसूस कर मुझे के मैं सहरा की प्यास हूँ!
मेरे ग़मों की धूप ने झुलसा दिया मुझे,
मुझको हवा न दीजिये सूखी कपास हूँ!
मेरे बग़ैर तू भी कहाँ जी सका ए दोस्त,
तेरे बग़ैर मैं भी यक़ीनन उदास हूँ!
आशु तो कुछ भी नहीं आसूँ के सिवा, जाने क्यों लोग इसे पलकों पे बैठा लेते हैं।
वहशी नहीं हूँ मैं न कोई बदहवास हूँ,
महसूस कर मुझे के मैं सहरा की प्यास हूँ!
मेरे ग़मों की धूप ने झुलसा दिया मुझे,
मुझको हवा न दीजिये सूखी कपास हूँ!
मेरे बग़ैर तू भी कहाँ जी सका ए दोस्त,
तेरे बग़ैर मैं भी यक़ीनन उदास हूँ!
मायने ज़िन्दगी के बदल गए,
कई अपने मेरे बदल गए!
करते थे बात आँधियों में साथ देने की,
हवा चली और सब मुक़र गए!
ना छेड किस्सा ए उल्फ़त का,
बड़ी लम्बी कहानी है.
मैं गैरों से नहीं हारा,
किसी अपने की मेहरबानी है.