Friday, March 29, 2019

सहरा की प्यास हूँ

वहशी नहीं हूँ मैं न कोई बदहवास हूँ,
महसूस कर मुझे के मैं सहरा की प्यास हूँ!

मेरे ग़मों की धूप ने झुलसा दिया मुझे,
मुझको हवा न दीजिये सूखी कपास हूँ!

मेरे बग़ैर तू भी कहाँ जी सका ए दोस्त,
तेरे बग़ैर मैं भी यक़ीनन उदास हूँ!

मुकर गए

मायने ज़िन्दगी के बदल गए,
कई अपने मेरे बदल गए!
करते थे बात आँधियों में साथ देने की,
हवा चली और सब मुक़र गए!

अपने की मेहरबानी

ना छेड किस्सा ए उल्फ़त का,
बड़ी लम्बी कहानी है.
मैं गैरों से नहीं हारा,
किसी अपने की मेहरबानी है.

मोहब्बत कैसी

मुझे छोड़ कर वो खुश है तो शिकायत कैसी,
अब मैं उन्हे खुश भी ना देखूँ तो मोह्ब्बत कैसी।।

Wednesday, March 27, 2019

शरीफ लोग


अंदर का जहर चूम लिया धूल के आ गए,
कितने शरीफ लोग थे, सब खुल के आ गए!
सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ,
सारे सिपाही मोम के थे, घुल के आ गए!!

-राहत इंदौरी


बिखरे हैं

 

गाँव, शहर

वे लोग जिनके गाँव नहीं होते,
शहर से ऊब कर कहाँ जाते होंगे?

मर्ज़-ए-मुहब्बत


ख़ुमार-ए-इश्क़ से बेहतर मिज़ाज भी नहीं कोई,
मर्ज़-ए-मुहब्बत का मगर, इलाज भी नहीं कोई!

तक़रीर जारी रखें

झूठ से, सच से, जिससे भी यारी रखें,
आप तो अपनी तक़रीर जारी रखें!

इन दिनों आप मालिक है बाजार के,
जो भी चाहें वो कीमत हमारी रखें!

तुम्हारे शहर में, हमारे गाँव में

तुम्हारे शहर में कोई मय्यत को कांधा नही देता,
हमारे गाँव में छप्पर भी सब मिल कर उठाते हैं!

बशीर बद्र