Monday, February 13, 2023

अब इजाजत का सवाल कहाँ

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मेरे होठों के करीब है होंठ तेरे,
ऐसे में शराफ़त का सवाल कहाँ,
करने दे जी भर के गुस्ताखियाँ
कि अब इजाजत का सवाल कहाँ.

Sunday, February 12, 2023

हाथ थाम ले या डूब जाने दे

बहता छोड़ दिया है

खुद को तेरे इश्क़ के समंदर में

अब तेरी मर्ज़ी

हाथ थाम ले या डूब जाने दे।

Thursday, February 9, 2023

तुझे चाहना मेरी आदत बन कर रह गई

​एक तमन्ना थी मेरी जो हसरत बन कर रह गई,

कभी दोस्ती थी तुमसे अब मोहब्बत बन कर रह गई,
कुछ इस तरह शामिल हुए तुम ज़िन्दगी में,
कि तुझे चाहना अब मेरी आदत बन कर रह गई.

उम्मीद मुझको फिर भी

​नाकाम हसरतों का

जनाज़ा भी उठ गया  
उम्मीद मुझको फिर भी 
तलाश-ए-वफ़ा की हैं/थी।

आशिकी के आलम में इश्क ही खुदा होता है

​दीवानगी का रिश्ता हर रिश्ते से जुदा होता है।

आशिकी के आलम में इश्क ही खुदा होता है।। 

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे 
जो इश्क़ को काम समझते थे 
या काम से आशिक़ी करते थे 
हम जीते-जी मसरूफ़ रहे 
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया 
काम इश्क़ के आड़े आता रहा 
और इश्क़ से काम उलझता रहा 
फिर आख़िर तंग आ कर हम ने 
दोनों को अधूरा छोड़ दिया 

Wednesday, February 8, 2023

तो क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं

​सुना है वो हमें भुलाने लगे हैं

तो क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं 

ये कहना था उनसे मुहब्ब्त हो मुझको

ये कहने मे मुझको ज़माने लगे हैं

बहुत मसरूफ़ होते जा रहे हो!

​मेरी फ़ुर्सत शिकायत कर रही है,

बहुत मसरूफ़ होते जा रहे  हो!


मुझे तो कॉल भी करते नहीं तुम,

किसी को फूल तक भिजवा रहे हो!


उन्हें कबसे यही समझा रहा हूँ,

मुझे बेकार में समझा रहे हो!


Aks Samastipuri

Thursday, February 2, 2023

दिल को मेरे समझे तुम सा हमनवा कोई न था।

इक तुम्हारी याद जैसा क़ाफ़िला कोई न था।
बस तुम्हें यूँ छोड़कर अब रास्ता कोई न था। 

साथ पल दो पल दिया और कुछ चले भी दूर तक, 
पर घने इन गेसुओं सा आसरा कोई न था। 

बेकसी थी ज़िंदगी में और उदासी थी बढ़ी, 
पर हसीं वो दूसरा तो सिलसिला कोई न था। 

दूर हमसे ख़ुद रहे तुम वक्त का था खेल सब, 
दो दिलो में वैसे तो अब फ़ासला कोई न था। 

क्यों किसी पे भी लुटा दे यूँ सुधा इस जान को, 
दिल को मेरे समझे तुम सा हमनवा कोई न था। 

Wednesday, February 1, 2023

हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना

​हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना 

हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना.

ये तर्ज़ एहसान करने का तुम्हीं को ज़ेब देता है 
मरज़ में मुब्तला कर के मरीज़ों को दवा देना 

बलाएँ लेते हैं उन की हम उन पर जान देते हैं 
ये सौदा दीद के क़ाबिल है क्या लेना है क्या देना 

ख़ुदा की याद में महवियत-ए-दिल बादशाही है 
मगर आसाँ नहीं है सारी दुनिया को भुला देना 


Akbar Allahabadi