Thursday, March 7, 2019

गुमान

मेरे हिस्से में बस इतना गुमान रहने दे,
कि मैं हूँ तेरा मुझे अपनी जान रहने दे!

अहमियत ही नहीं

ज़रा सा क़तरा कहीं आज गर उभरता है,
समन्दरों ही के लहजे में बात करता है!

ख़ुली छतों के दिये कब के बुझ गये होते,
कोई तो है जो हवाओं के पर कतरता है!

शराफ़तों की यहाँ कोई अहमियत ही नहीं,
किसी का कुछ न बिगाड़ो तो कौन डरता है!

इंसाफ

ये तो नहीं कहता हूँ कि सच-मुच करो इंसाफ़,
झूटी भी तसल्ली हो तो जीता ही रहूँ मैं!

पीने का सलीका, पिलाने का शूर

इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में,
तुमको लग जाएंगी सदियां इसे भुलाने में,
न तो पीने का सलीका, न पिलाने का शूर,
अब तो ऐसे लोग चले आते हैं मैखाने में!
~नीरज

मय, मयकश, मयखाना, शराब,

इतने बदनाम हुए हम तो इस जमाने में,
तुमको लग जाएंगी सदियां इसे भुलाने में!
न तो पीने का सलीका, न पिलाने का शूर,
अब तो ऐसे लोग चले आते हैं मैखाने में!
~नीरज

कोई समझाए ये क्या रंग है मैख़ाने का,
आँख साक़ी की उठे नाम हो पैमाने का!
गर्मी-ए-शमा का अफ़साना सुनाने वालों,
रक्स देखा नहीं तुमने अभी परवाने का!

न शराबी हूँ मैं और,
न मय से रिश्ता मेरा,
फिर भी नशे में रहता हूँ क्यूँकि,
किसी नशीली आँखों से है वास्ता मेरा!

शाम बन गई सहर

हो सका न कुछ मगर शाम बन गई सहर
वह उठी लहर कि ढह गये किले बिखर-बिखर
और हम डरे-डरे नीर नैन में भरे
ओढ़कर कफ़न पड़े मज़ार देखते रहे।
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे।

~ गोपालदास नीरज

Saturday, March 2, 2019

रिश्ते में ऐहतियात

दिल मे तकब्बुर,जुबां पर वो कड़वाहटरखते हैं,
और कहते हैं रिश्तॆ निभाने मे ऐहतियात बरतते हैं!

हुस्न का आलम

इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का,
क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम!

Friday, March 1, 2019

गज़ल, शेर, दाद

मोहब्बत से भरी कोई गजल उसे पसंद नहीं,
बेवफाई के हर शेर पे वो दाद दिया करते हैं।

शायर कह कर मुझे बदनाम ना करना दोस्तो,
में तो रोज़ शाम को दिन भर का हिसाब लिखता हूँ।

दिल हार बैठे

हमें कँहा से आएगा दिल जीतना,
हम तो अपना दिल भी तुम पर हार बैठे है!